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अतीत के आइने में जोधपुर : कचहरी भवन

पार्ट-11

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अतीत के आइने में जोधपुर : कचहरी भवन

अतीत के आइने में जोधपुर : कचहरी भवन

नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. ऐतिहासिक कचहरी भवन (जुबली कोर्ट) का निर्माण महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय ने सन 1886 में प्रारम्भ करवाया । लेकिन 11 अक्टूबर सन 1895 को महाराजा जसवंतसिंह का देहान्त हो जाने से महाराजा सरदार सिंह ने सन 1897 में निर्माण पूरा करवाया । कचहरी भवन निर्माण व मार्गदर्शन में सबसे बड़ा योगदान सर प्रतापसिंह का रहा जिनके देहान्त के बाद मुख्य भवन के सामने उनकी भव्य मूर्ति स्थापित की गई है । इसका निर्माण ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की गोल्डन जुबली की यादगार में बनाया गया था इसीलिए इसे जुबली कोर्ट तथा इसमें महकमा खास के बावन दफ्तर बनने से भवन को बावन कचहरियां भी कहा जाता रहा है । इसके निर्माण पर तब कुल 4 लाख 79 हजार 716 रुपए व्यय हुए और भवन की लम्बाई 950 फुट है ।

अखबार में दिया था भवन के नक्शें का विज्ञापन
कचहरी भवन का नक्शा इंग्लैण्ड के वास्तुविद् सर स्विटन जैकब ने बनाया तथा इसका निर्माण जोधपुर रेलवे के जनरल मैनेजर डब्ल्यू होम की देखरेख में जोधपुर निवासी सिलावट गजधर इस्हाक की ओर से किया गया । कचहरी के निर्माण के समय महाराजा जसवंतसिंह ने अखबार में विज्ञापन दिया था कि जो व्यक्ति कचहरी का नक्शा सबसे अच्छा बनाएगा उसे एक हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा । उस वक्त 9 नक्शे बन कर आए और उनमें जेकब का नक्शा पसन्द किया गया और उन्हें इनाम के एक हजार रुपये अलग से दिए गए।

सर प्रताप की प्रतिमा
सर प्रताप की मृत्यु के पश्चात उनकी खूबसूरत प्रतिमा कचहरी के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने सन् 1925 में स्थापित करवाई गई । लाल पत्थर से निर्मित विशाल कचहरी भवन राजस्थान में अपने ढंग का एक ही भवन है । यहां राज्य की सब अदालतें लगती थीं ।

फोटो साभार: एमएमटी