
बासनी/चौपासनी (जोधपुर).
तारा जड़ी गोटा वाली नटखट सी वो चुनड़.... पहन के उसकी पांच सहेलियां खेलन लागी घूमर...
रंग रंगीली चूडिय़ां पहने लटकन वाली झूमर.... सावन-भादो कैसे बीता कब आ गई ये उमर.....!!
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के 16 सेक्टर स्थित नवजीवन संस्थान (लवकुश गृह) की फिजाओं में गूंजता यह गीत आज परिणय सूत्र में बंधनें जा रही 6 बेटियों के पालने से पालकी तक के सफर को बयां करता है। संस्थान में होश संभालने से पहले आई बेटियां आज यौवन की दहलीज पर आ खड़ी है। संस्था के सदस्यों, सखियों, साथियों और शहर वासियों के साथ ही यहां का हर कोना आज इन बेटियों को हंसी-खुशी विदा करेगा। नवजीवन संस्था के लवकुश शिशु गृह में रविवार को परिणय सूत्र में बंधने जा रही इन बेटियों के वैवाहिक समारोह में शहर की कई जानी-पहचानी हस्तियां भाग लेगी।
सूर्यनगरी में अपणायत की है परम्परा
भले ही सूरज के शहर जोधपुर में भौगोलिक माहौल के कारण सूरज की तपिश है, लेकिन लोगों के दिलों में ठंडक और शहर की हवा में अपणायत आज भी बसी हुई है। नवजीवन संस्थान में सहयोग देने वाले शहरवासियों ने समय-समय पर इसे साबित भी किया है। वे बेटियां जिनका कोई नहीं था, पहले तो उन्हें नवजीवन ने अपनाया और फिर शहर के बेटों ने इन्हें अपने जीवन साथी का फैसला किया है। वहीं कई शहरवासी भी एक परिवार का अहसास दिलाते हुए बेटियों के विवाह से पहले विभिन्न रस्मों में बंदोळी से लेकर कन्यादान तक आगे आ चुके हैं।
बेटियों के आत्मविश्वास के लिए दे रहे हैं गिफ्ट
संस्थान प्रभारी राजेन्द्र परिहार ने बताया कि बेटियों को यह नहीं लगे कि उनका इस संसार में कोई नहीं है, इसलिए उनमें आत्मविश्वास के लिए शादी के समय गिफ्ट की व्यवस्था भी की है। बेटियों को टीवी, फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, वाटर प्यूरिफायर, बेड सहित घरेलू सामन बतौर गिफ्ट दिए जाएंगे। परिहार ने बताया कि बेटियों को ससुराल में भविष्य में किसी प्रकार के ताने नहीं सुनने पड़े इसलिए 5 तौला सोना भी गिफ्ट किया जाएगा।
घर परिवार की तरह निभाई रस्में-
परिहार ने बताया कि घर-परिवार में होने वाले शादी समारोह की तरह इन बेटियों के विवाह से पहले की विभिन्न रस्मों को निभाया गया। बुधवार सुबह रातानाडा गणेश मंदिर से प्रतिमा लाकर गणेश जी की पूजा-अर्चना की गई। बेटियों को घी पिलाकर बान बिठाया गया। गुरुवार को हल्दी व मेहंदी की रस्म अदा की गई। शुक्रवार शाम को महिला संगीत के कार्यक्रम में संस्था की विभिन्न इकाइयों सहित अतिथि महिलाओं ने संगीतमयी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। शुक्रवार को बेटियों के ससुराल पक्ष की ओर से पड़ला सामग्री लाई गई। शादी के दौरान वर पक्ष को ध्यान में रखते हुए उसी समाज के किसी परिवार का चयन कर कन्यादान की रस्म निभाई जाएगी।
संस्था ही निभाता है पीहर के रिवाज-
बेटियों की शादी के साथ ही नवजीवन संस्थान पीहर पक्ष के संपूर्ण रीति-रिवाज निभाता आ रहा है। परिहार ने बताया कि इससे पहले संस्था की 13 बेटियों की शादी हो चुकी है। मारवाड़ की मान्यता के अनुसार बेटियों का प्रथम प्रसव मायके में होता है, इसलिए विवाहित बेटियों के प्रथम प्रसव भी संस्था की देखरेख में ही हुए। इसके साथ ही समय-समय पर होने वाले विभिन्न रिवाजों के दौरान भी संस्था के सदस्य ही वर पक्ष के लिए समधी की भूमिका निभाते हैं।
सैंकड़ों में से चुने हैं ये बेटे-
परिहार ने बताया कि इन बेटियों की शादी के लिए करीब 300 रिश्ते आए। इनके घर, परिवार, सगे-संबंधियों और पड़ौसियों से पूछते हुए बेटियों की इच्छानुसार ही 6 लड़कों का चयन किया गया। बेटियों को इनके घर दिखाते हुए पड़ौसियों से मिलवाकर सलाह ली गई। बी कॉम पास गीता का विवाह कमलेश के साथ किया जा रहा है, जिनका रेडिमेड गारमेंट का व्यवसाय है। पूजा ने नर्सिंग कर रखी है वहीं उनके होने वाले दुल्हे सचिन का हैण्डलूम का शो रूम है। राधा ने ब्यूटी पार्लर का काम सीख रखा है तो इनके होने वाले जीवन साथी सूरज इंजीनियर है। रेखा ने फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया है तो इनके होने वाले जीवन साथी शुभम का टैक्सटाइल का काम है। गायत्री ने ब्यूटी पार्लर में आईटीआई की है औैर इनके होने वाले साजन अंकित का स्टेशनरी का व्यवसाय है। एकता ने भी ब्यूटी पार्लर का काम सीख रखा है और इनके होने वाले पति रवि का मोटरपाट्र्स का काम है।
Published on:
29 Oct 2017 02:14 am
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