
- तोषी शर्मा
जोधपुर। यह खबर उनके लिए प्रेरणा है, जो बेटियों को बोझ समझ कोख में ही मार डालने पर आमादा हो जाते हैं। ऐसे लोगों को शहर के ओम नगर (बनाड़) में रहने वाले सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन चैनसिंह राठौड़ के परिवार से सीख लेनी चाहिए। राठौड़ की सात बेटियां हैं। सातों ही खेलों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर परिवार का गौरव बढ़ा चुकी हैं। दो बेटियां स्काउट गाइड में राष्ट्रपति अवार्ड हासिल कर चुकी हैं। राठौड़ सेना में रहते मोर्चे पर डटे रहे, तो उनकी पत्नी धापू कंवर ने घर के मोर्चे पर सातों बेटियों को काबिल बनाने की जिम्मेदारी पूरी की। धापू कंवर कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन सपना था कि बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही अच्छा खिलाड़ी भी बनाए। इसके लिए परिवार के ताने भी सुने, लेकिन परवाह नहीं की।
वो कहती थी, बेटियों को पढ़ाकर इंदिरा गांधी बनाओगी क्या?
बकौल धापू कंवर, दादी सास कहती थी कि बेटियों को पढ़ाकर इंदिरा गांधी बनाओगी क्या? पति ड्यूटी से 6-6 माह बाद घर आते थे। स्कूल के कार्यक्रमों में बेटियों के साथ धापू कंवर ही जाती थीं। खेल प्रतियोगिताओं में दूसरे शहर में अपनी लाड़लियों को कभी अकेले भेजती तो कभी खुद साथ जाती थीं। परिवार व पड़ोस के लोग कहते थे कि लड़कियों को खेलने क्यों भेजते हो? उन्हें कई दिनों तक अकेले जाना पड़ता है। वह एक ही जवाब देती कि उसे अपनी बेटियों पर भरोसा है। सात बहनों का इकलौता भाई 11 वर्षीय हर्षवर्धन सिंह आर्मी स्कूल में छठीं कक्षा में पढ़ता है।
सातों एक से बढकऱ एक
1. भंवर कंवर : खो-खो में राज्य स्तर पर उम्दा प्रदर्शन कर चुकी हैं।
2. कमल कंवर : ये भी खो-खो में राज्य स्तरीय खिलाड़ी रहीं हैं।
3. संतोष कंवर : कबड्डी में 3 बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खेली।
4. नखत कंवर : एथलेटिक्स की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेल चुकी हैं।
5. भानू कंवर : एथलेटिक्स व खो-खो में नेशलन अवार्डी रह चुकी हंै।
6. सिद्धि कंवर : एथलेटिक्स में राज्य स्तर की खिलाड़ी, स्काउट एवं गाइड में राष्ट्रपति पदक हासिल कर चुकी है।
7. पिंटू कंवर : हैंडबॉल में तीन बार राष्ट्रीय व एथलेटिक्स में राज्य स्तर पर खेल चुकी है। पिंटू ने भी स्काउट-गाइड में राष्ट्रपति पदक हासिल किया।
Updated on:
05 Feb 2018 02:35 pm
Published on:
05 Feb 2018 09:38 am
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