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जोधपुर के प्रसिद्ध बाईजी का तालाब और गंगलाव की सूरत सुधारेगा नगर निगम, महापौर ने किया निरीक्षण

बुधवार से पंप लगाकर पानी खाली करने का काम भी शुरू हो जाएगा। इस जगह पर निगम प्रोटेक्शन दीवार भी बनाएगा।

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अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. शहर के बर्बाद होते पारंपरिक जलस्रोतों को लेकर नगर निगम आखिरकार चेत गया है। महापौर घनश्याम ओझा ने बदहाली का दंश झेल रहे बाईजी तालाब का मंगलवार को निरीक्षण किया तथा दुर्दशा देख अधिकारियों को हालात सुधरवाने के निर्देश दिए। महापौर ओझा ने कूड़ा गृह बन रहे गंगलाव तालाब पर अवैध रूप से घरों के जोड़े गए सीवरेज कनेक्शन काटने के लिए कहा। साथ ही अधिकारियों को कहा कि पड़ोसियों को पाबंद किया जाए कि यहां किसी तरह से मलबा न डाला जाए। निगम अब यहां से अतिरिक्त गाडिय़ां लगाकर मलबे को हटाने का काम भी करेगा। साथ ही बुधवार से पंप लगाकर पानी खाली करने का काम भी शुरू हो जाएगा। इस जगह पर निगम प्रोटेक्शन दीवार भी बनाएगा।

महापौर ने भविष्य में मलबा नहीं डाला जाए इसके लिए पुख्ता इंतजाम करने और बाई जी का तालाब की क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार को वापिस बनाने के निर्देश दिए हैं। बाईजी तालाब क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मलबा पड़ा है। यह सभी कार्य होने के बाद बाई जी के तालाब के सौंदर्यीकरण के कार्यों की कार्य योजना तैयार की जाएगी। निगम को अंदेशा है कि यहां मलबा डाला जा रहा है, ऐसे में भविष्य में अतिक्रमण तक हो सकता है। इस दौरान सीवरेज समिति अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण सोलंकी, मुख्य अभियंता सुमनेश माथुर व एसई संपत मेघवाल सहित निगम के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

ऐतिहासिक तालाब का बिगड़ रहा स्वरूप
बाईजी तालाब क्षेत्र का लंबे समय से स्वरूप बिगड़ा हुआ है। इस क्षेत्र का अपनेआप में ऐतिहासिक स्वरूप है। जबकि इन दिनों लोगों को यहां से नाक बंद कर गुजरना पड़ता है। इसके अलावा शहर में और भी कई बैरे-बावडिय़ां उपेक्षित हालत में हंै। जिनकी भी कोई सुध लेने वाला नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जोधपुर की चांदबावड़ी का नाम लिए जाने के बाद स्थानीय लोगों, एक समाजसेवी संस्था व नगर निगम ने सफाई में सहयोग दिया था। इसी तरह गंगलाव तालाब भी दुर्दशा का शिकार है।