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Jodhpur Textile Industry: जोधपुर के रेयॉन की देशभर में धाक, तैयार होता एक्सपोर्ट ब्रांड का कपड़ा

Jodhpur Textile Industry: 20 लाख मीटर कपड़ा तैयार करता है जोधपुर, प्रदूषण का दंश मिटे तो दोगुना हो सकता है रोजगार

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Big companies will invest 12508 crores in textile industry in MP

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Jodhpur Textile Industry: करीब पांच दशक पुराना जोधपुर का टेक्सटाइल उद्योग स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी की घोषणा से उत्साहित है। जोधपुर-पाली में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल सिटी में पांच प्रमुख सेक्टर में एक टेक्सटाइल है। कपड़ा उद्योग पिछले कई दशक से प्रदूषण का दंश झेल रहा है। उसको इस श्राप से मुक्ति भी चाहिए, लेकिन इन सबके विपरीत जोधपुर के उद्यमी एक्सपोर्ट लेवल का कपड़ा तैयार कर रहे हैं। पत्रिका ने जब यहां के कपड़ा उद्योग की खासियत जानी तो पाया कि रेयॉन फेब्रिक वुमेन क्लोथिंग में सर्वाधिक उपयोग होता है। उसमें जोधपुर की धाक पूरे देश में जम चुकी है।

कुछ ऐसे हुई शुरुआत

करीब पांच दशक पहले रंगाई-छपाई का कुटीर उद्योग बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में सामने आया। धीरे-धीरे इसका विकास हुआ और शहर में 305 टेक्सटाइल यूनिट काम कर रही है। तीन बड़ी केटेगरी को मिलाकर 20 लाख मीटर कपड़ा तैयार होता है, जिनसे सीधे 25 हजार और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख लोगों को रोजगार मिलता है। जोधपुर, पाली और बालोतरा के साथ बड़ा टेक्सटाइल हब है, लेकिन प्रदूषण इस पर सबसे बड़ा कलंक भी है।

रेयॉन में बादशाहत

दरअसल, रेयॉन एक प्रकार का फेब्रिक है,जो कि वीमेन क्लोथिंग में उपयोग होता है। जोधपुर से करीब 12 लाख मीटर कपड़ा प्रोसेस होकर देश के कई बड़े शहरों में जाता है। उद्यमी मोहित अग्रवाल बताते हैं कि इससे कुर्ती, प्लाजो, टॉप और अन्य गारमेंट बनाए जाते हैं। इसी सेक्टर को इंडस्ट्रियल सिटी में बढ़ावा देने की बात कही गई है। अभी रेयॉन प्रोसेसिंग में जोधपुर टॉप पर है।

प्रदूषण बड़ा दंश

इस उद्योग का विकास रुकने के पीछे कारण जल प्रदूषण भी है। हालांकि सीईटीपी लगाकर पानी को ट्रीट किया जाता है। इसके बावजूद जोजरी नदी से होकर पानी कई गांवों में फैलता है। प्रतिदिन 18 से 20 एमएलडी पानी डिस्चार्ज होता है। ऐसे में जोधपुर को जेएलडी या डीप सी प्रोजेक्ट की सख्त जरूरत है।

ओढ़ना-दुपट्टा… सरदारों की पगड़ी

  • एक तिहाई इकाइयां तो ओढऩा और दुपट्टे बनाने का काम करती हैं।
  • सरदारों की पगड़ी का कपड़ा भी जोधपुर में तैयार होता है। यहां से पंजाब तक सप्लाई होती है।
  • मल्टी सिटी ब्रांडेड शोरूम में भी कपड़ा जोधपुर से जाता है।

कपड़ा उद्योग ने साल दर साल काफी विकास किया है। एनजीटी और प्रदूषण के कारणों से कुछ सालों से विकास रुका है। फिर भी जोधपुर के उद्यमी विपरित परिस्थितियों में भी बेहतर काम कर रहे हैं। प्रदूषण मुक्त माहौल मिलना चाहिए और स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी से काफी उम्मीदें हैं। जो वर्तमान में कपड़ा प्रोसेस है वह दोगुना हो सकता है और रोजगार भी कई गुणा बढ़ सकता है।

  • जसराज बोथरा, अशोक संचेती, टेक्सटाइल हैंड प्रोसेस एसोसिएशन

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