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563वां स्थापना दिवस- दुनियाभर में मशहूर है जोधपुर का हस्तशिल्प व पहनावा

प्रगति के पथ पर 'राव जोधा' का जोधपुर

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563वां स्थापना दिवस- दुनियाभर में मशहूर है जोधपुर का हस्तशिल्प व पहनावा

563वां स्थापना दिवस- दुनियाभर में मशहूर है जोधपुर का हस्तशिल्प व पहनावा

जोधपुर। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। कलात्मक रूप से बनी हुई रंगबिरंगी पोशाकें पहने हुए लोगों को देखकर प्रतीत होता हैं कि जोधपुर की जीवनशैली असाधारण रूप से सम्मोहित करने वाली है। औरतें घेरदार लहंगा और आगे व पीछे के हिस्सों को ढकने वाली तीन चौथाई लंबाई की बांह वाली नितम्ब स्थल तक की जैकेट पहनती हैं। पुरुषों द्वारा पहनी हुई रंगीन पगड़ियाँ शहर में ओर भी रंग बिखेर देती हैं। आमतौर से पहने जाने वाली ढ़ीली ढ़ाली और कसी, घुड़सवारी की पैंट जोधपुरी ने यहीं से अपना नाम पाया। जोधपुर के कपड़ों में जोधपुरी कोट पूरे भारत में प्रसिद्ध है।


दुनियाभर में मशहूर है हस्तशिल्प
उत्कृष्ट हस्तशिल्पों के समृद्ध संग्रह का रंगीन प्रदर्शन देखकर जोधपुर के बाजारों में खरीददारी करना एक उत्साहपूर्ण अनुभव है। बंधेज का कपड़ा, कशीदाकारी की हुई चमड़े, ऊंट की खाल, मखमल की जूतियां आकर्षक रेशम की दरियां मकराना के संगमरमर से बने स्मृतिचिन्ह, उपयोगी व सजावटी वस्तुओं की विस्तृत किस्में आदि इन बाजारों में पाई जाती हैं।

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