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MISSION NIRYATAK—प्रदेश में निर्यात के लिए जोधपुर बनेगा रोल मॉडल

- निर्यात प्रोत्साहन के लिए सरकार की पहल 'मिशन निर्यातक बनोÓ के लिए संभावित निर्यातक को कोड जारी

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जोधपुर

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Amit Dave

Aug 03, 2021

MISSION NIRYATAK---प्रदेश में निर्यात के लिए जोधपुर बनेगा रोल मॉडल

MISSION NIRYATAK---प्रदेश में निर्यात के लिए जोधपुर बनेगा रोल मॉडल

जोधपुर।
राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में निर्यात उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जहां एक ओर हैण्डीक्राफ्ट पॉलिसी लाने की तैयारियां चल रही है। वहीं दूसरी ओर से सरकार ने प्रदेश में निर्यातक तैयार करने के लिए 'मिशन निर्यातक बनोÓ कार्यक्रम लांच किया है। सरकार के इस प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का जोधपुर को विशेष लाभ मिलेगा और जोधपुर प्रदेश में निर्यात के लिए रोल मॉडल बनेगा। निर्यात के लिए जोधपुर में प्रचुर संभावनाएं है। इसके साथ ही, सरकार के 'मिशन निर्यातक बनोÓ भी निर्यात क्षेत्र को गति देने में भूमिका निभाएगा।प्रदेश के निर्यात कारोबार में जोधपुर व जयपुर बड़े हब है। इसके अलावा उदयपुर से प्रमुख रूप से मार्बल व भिवाड़ी से ऑटोमोबाइल उपकरण, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स आदि निर्यात होते है। जयपुर से जेम्स एण्ड ज्वैलरी, टेक्सटाइल व हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात होता है। वहीं हैण्डीक्राफ्ट विशेषकर लकड़ी के हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों ने जोधपुर को विश्वभर में पहचान दिलाई है। इसके अलावा, जोधपुर से एग्रो प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल व स्टोन आदि निर्यात हो रहे है।
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प्रदेश में 3 आइसीडी केवल जोधपुर में
निर्यात के लिए जोधपुर की महत्ता इस बात से भी साबित होती है कि प्रदेश में इनलेण्ड कंटेनर डिपो (आइसीडी) केवल जोधपुर में ही है। राजसीको की ओर से संचालित, रेलवे की ओर से कॉनकोर व निजी क्षेत्र का ड्राइ थार पोर्ट संचालित हो रहा है। वहीं, जयपुर में केवल एक ही आइसीडी है।
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3 हजार करोड़ का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात
जोधपुर से सबसे ज्यादा हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात होता है। यहां से सालाना करीब 3 हजार करोड़ के हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात होता है। इसके अलावा हैण्डीक्राफ्ट निर्यात प्रोत्साहन के लिए कार्य रही इपीसीएच संस्था का भी जोधपुर में कार्यालय व पकड़ है। हैण्डीक्राफ्ट निर्यात की सपोर्टिंग एजेन्सी के रूप में इसीजीसी सहित अन्य संस्थाएं भी यहां सक्रिय रूप से कार्य कर निर्यात कारोबार को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रही है।
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हैण्डीक्राफ्ट उद्योग
- 3 हजार करोड़ का सालाना टर्न ओवर
- 750 हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक
- 2000 से ज्यादा फैक्ट्रियां
- 2 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से दे रही रोजगार
- 100 से अधिक देशों में निर्यात हो रहा जोधपुरी हैण्डीक्राफ्ट
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आमुखीकरण कार्यशाला 6 को
उद्योग विभाग व रीको 'मिशन निर्यातक बनोÓ कार्यक्रम के तहत संभावित निर्यातकों की पहचान कर उन्हें आयात-निर्यात कोड, जीएसटी पंजीयन आदि आवश्यक औपचारिकताओ की जानकारी देने के साथ मौके पर ही ऑनलाइन स्वीकृतियां प्रदान कराएगा। इसके लिए 6 अगस्त को स्टील भवन में आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। संभावित निर्यातक को आयात निर्यात कोड जारी वहीं सोमवार को उद्योग विभाग व रीको अधिकारियों की बैठक के दौरान कुशल कामगार व संभावित निर्यातक रमेश जांगिड़ व मुकेश दिवराया को आयात-निर्यात कोड जारी करवाकर मिशन का शुभारंभ किया गया। बैठक के दौरान रीको बोरानाडा के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबन्धक विनीत गुप्ता, रीको जोधपुर के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबन्धक संजय झा, उद्योग विभाग की सहायक निदेशक पूजा मेहरा एवं जिला उद्योग अधिकारी प्रीति गुर्जर भी उपस्थित थी।
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सरकार की यह अनूठी पहल है। इसमें जोधपुर में करीब 1 हजार लोगों की आइइसी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं लोगों को निर्यात लाइसेंस बनाने से लेकर उत्पाद निर्यातक होने तक मदद की जाएगी।
एसएल पालीवाल, महाप्रबंधक
जिला उद्योग केन्द्र
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योजना का सही क्रियान्वयन हो तो यह कार्यक्रम जोधपुर व प्रदेश के लिए माइलस्टोन होगा। साथ ही, हैण्डीक्राफ्ट उद्योग की सफलता के लिए भी नए द्वार खुलेंगे।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

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