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छीतर में कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम पर चली पानी की चादर

केन्द्र के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल संरक्षण के प्रोजेक्ट के रूप में बनाए जा रहे कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम मानसून की पहली ही बरसात में लबालब हो गए है। इन डैम से बरसात के पानी का रिचार्ज होगा और भूजल के स्तर में वृद्धि होगी।

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छीतर में कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम पर चली पानी की चादर

छीतर में कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम पर चली पानी की चादर

-जोधपुर जिले में बन रहे 90 कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम, 30 का निर्माण पूरा
-इसी मानसून में शेष डेम भी बनकर तैयार हो जाएंगे
-पहली बारिश में करीब 23 कृत्रिम वाटर रिचार्ज
-डेम में पानी की आवक, बढ़ेगा क्षेत्र का भू जलस्तर

बेलवा (जोधपुर). केन्द्र के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल संरक्षण के प्रोजेक्ट के रूप में बनाए जा रहे कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम मानसून की पहली ही बरसात में लबालब हो गए है। इन चेक डेम से बरसात के पानी का रिचार्ज होगा और भूजल के स्तर में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा। क्षेत्र के छीतर की पहाडि़यों में बने चेक डेम में वर्षा जल आने से चादर चली।
दरअसल, जोधपुर जिले में पिछले साल 10 नवंबर को कृत्रिम रिचार्ज से भूजल वृद्धि योजना की शुरुआत हुई थी। योजना के तहत करीब 90 एनीकट्स और चेक डेम का निर्माण हो रहा है, जिनमें से 30 का निर्माण कार्य किया जा चुका है।

वहीं 20 डेम का कार्य भी अंतिम चरण में है। हाल ही बारिश में करीब 23 कृत्रिम वाटर रिचार्ज डेम में पानी की आवक हुई है। वहीं शेष का निर्माण कार्य वाप्कोस लि. की देखरेख में जारी है। इसी मानसून के दौरान इनका निर्माण भी पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


100 करोड़ का पायलट प्रोजेक्ट
अटल भूजल योजना के तहत जोधपुर जिले में 100 करोड़ की लागत से ग्राउंड वाटर रिचार्ज का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। भूजल भरण से जुड़े स्ट्रक्चरों के अलावा तिवंरी के इंद्रोका और शेरगढ के बस्तवा माताजी गांवों में दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर पानी को रोका जाना है, ताकि ग्राउंड वाटर रिचार्ज हो सके।

बस्तवा माताजी बांध में तो अनुमानित 100 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी एकत्रित होने का लक्ष्य रखा गया है। यह पानी जब जमीन में रिचार्ज होगा तो आसपास के बहुत बड़े क्षेत्र में पीने के पानी और खेती के लिए पानी कई दशकों तक निर्बाध रूप से मिलेगा।