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जोधपुर के कारसेवक शुद्धराज लोढ़ा ने साझा किए संस्मरण, कहा साथी को गोली लगने पर उनके मृत्यु की फैल गई थी अफवाह

भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ के पुराने वरिष्ठ नेताओं में से एक शुद्धराज लोढ़ा ने अयोध्या में कारसेवा के लिए हिस्सा लिया था। उन्होंने अयोध्या में 1990 में उनके साथी महेन्द्रनाथ अरोड़ा और सेठाराम परिहार की गोली लगने से मृत्यु की घटना को याद करते हुए कई संस्मरण सुनाए। उनके शव वे ही जोधपुर लेकर आए थे।

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ के पुराने वरिष्ठ नेताओं में से एक शुद्धराज लोढ़ा ने अयोध्या में कारसेवा के लिए हिस्सा लिया था। उन्होंने अयोध्या में 1990 में उनके साथी महेन्द्रनाथ अरोड़ा और सेठाराम परिहार की गोली लगने से मृत्यु की घटना को याद करते हुए कई संस्मरण सुनाए। उनके शव वे ही जोधपुर लेकर आए थे।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और इसे शांतिपूर्ण तरीके से जनता द्वारा स्वीकार करने पर उन्होंने खुशी जताई। 89 वर्षीय लोढ़ा ने अपने निवास पर उस दौर की कई बातें साझा की। सन् 1990 में कार सेवा के लिए अयोध्या गए थे। अयोध्या में हम अखाड़े के समीप भीड़ में चल रहे थे। अचानक भीड़ पर गोलियां चलाई गई।

गोलियां ऊपर से चल रही थी। एक गोली मेरे साथ ही चल रहे अरोड़ाजी के पेट में लगी। मैं बच गया। हड़बड़ी हुई और पास ही एक मकान के बरामदे में छुप कर मैंने जान बचाई। हमारे साथी सेठाराम परिहार को भी गोली लगी थी। हमारे एक कार्यकर्ता नई गाड़ी खरीद कर लाए थे। उसमें दोनों साथियों के शव लेकर मैं वहां से आया था।

हम अयोध्या दो-तीन बार गए। जब अरोड़ाजी साथ थे तो वहां हमें छुप कर रहना पड़ रहा था। 200 किलोमीटर से भी अधिक पैदल छुपते हुए हम अखाड़े तक पहुंचे थे। सब तरफ खौफ का साया था। लेकिन दिल में जोश था। इस बीच मुझे जानकारी हुई कि जोधपुर में मेरे निधन की अफवाह फैल गई है। जोधपुर का एक अखबार मुझे अयोध्या में मिला था। फिर मैंने घर पर इत्तला दी कि मैं जिंदा हूं और दो साथियों की मृत्यु हुई है।

मैं 1941 में करीब 10 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गया था। जब मेरे साथियों की मृत्यु हो गई तो मैंने अयोध्या विवाद का निस्तारण होने तक दाढ़ी नहीं करने का प्रण लिया। कई वर्षों तक मैंने दाढ़ी बढ़ाकर रखी थी। अब खुशी है कि उस समय के संघर्ष को न्यायालय ने स्वीकार किया। देश में सौहार्द व शांति बनी रहे यही अपील है।