21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जोधपुर

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने मुंबई गए अश्विनी को ऐसा भाया टीवी, आज केसरी नंदन सहित कई धारावाहिक का कर रहे निर्देशन

दर्शकों को राजस्थानी परंपरा और संस्कृति से करवा रहे रू-ब-रू

Google source verification

जोधपुर. पाल रोड निवासी अश्विनी सारस्वत ने यह कभी नहीं सोचा था कि वे टीवी जगत का हिस्सा बनेंगे। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर मुंबई नौकरी करने गए अश्विनी को फिल्म मेकिंग का ऐसा कीड़ा लगा कि आज वह कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहे टीवी सीरियल केसरी नंदन का निर्देशन कर दर्शकों को राजस्थानी परंपरा और संस्कृति से रू-ब-रू करवा रहे हैं। बीते दिनों अपने गृहनगर आए अश्विनी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि उन्होंने शुरुआत एक्टिंग से की। छोटे रोल करने के बाद उन्होंने निर्देशन का रुख किया। कई धारावाहिकों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर कार्य करने के बाद आज वह मुख्य निर्देशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

पलटन से पलटी राह
अश्विनी ने बताया कि 2015 में डीडी वन पर पलटन शीर्षक टीवी सीरियल का प्रसारण हो रहा था। इस दौरान उसका निर्देशक बीमार पड़ गया। ऐसे में इसके निर्देशन की कमान उनके हाथ में आई। उनके हुनर को देखते हुए इसके 52 एपिसोड्स और शूट करने का अवसर मिला। इसके बाद विषकन्या, परमावतार श्री कृष्ण, नेटफिल्क्स के बैटल ऑफ सारागढ़ी, कौन है आदि टीवी सीरियल्स का निर्देशन करने का मौका मिला। इससे पहले उन्होंने महिमा शनिदेव की, जय जय बजरंग बली, महाराणा प्रताप, अशोका, इमोशनल अत्याचार और चंद्रगुप्त मौर्य सहित विज्ञापन आदि का सह निर्देशन किया है। उन्होंने बताया कि निर्देशक के तौर पर 12 सौ बच्चों को निर्देशित करना कठिन रहा। पहले यह नामुमकिन लगा लेकिन फिर बच्चों का मनोविज्ञान समझने के बाद शूट करने में आसानी हुई।

8 महीने घरवालों को नहीं हुआ मालूम

निर्देशन के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे अश्विनी ने करीब 8 महीने यह बात परिजनों को नहीं बताई। उनके नए कार्य की जानकारी होने पर पहले तो परिजनों ने रोष जताया, लेकिन उनका कार्य और लगन देखने के बाद सहयोग किया। उन्होंने बताया कि एक निर्देशक को 90 प्रतिशत खुद अभिनय कर के समझाना होता है। टीवी सीरियल्स में बढ़ रहे वीएफएक्स के बारे में कहा कि इससे स्तर अवश्य बढ़ गया है लेकिन हम इस पर निर्भर होने लगे हैं। युवा अदाकारों के लिए उन्होंने संदेश दिया कि जुबान साफ करना और थिएटर से अभिनय की जानकारी जरूरी है।