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IIT: जानिए मरीजों को कैसे ठीक करेगा सांप का जहर

- सांप के जहर में से जहरीला प्रोटीन हटाकर बैक्टीरिया को मारने के लिए तैयार किया नया पेप्टाइड - चूहों पर सफलतापूर्वक परीक्षण, अब एम्स में मरीजों के सैंपल पर होगा टेस्ट- एंटीबायोटिक रजिस्टेंस को देखते हुए बड़ी सफलता

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IIT: जानिए मरीजों को कैसे ठीक करेगा सांप का जहर

IIT: जानिए मरीजों को कैसे ठीक करेगा सांप का जहर

जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT जोधपुर ने दक्षिण अमरीका में बहुतायात में पाए जाने वाले कॉमन लैंचहैड सांप के जहर से एंटीबायोटिक व एंटीमाइक्रोबियल दवाई बनाई है जो टीबी, निमोनिया, टाइफाइड जैसे कई रोगों में काम आएगी। शुरुआती तौर पर आईआईटी ने डायबिटीज से ग्रसित चूहे के घाव पर इस एंटीबायोटिक का सफल परीक्षण किया है। शोध के पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है। अब दूसरे चरण में एम्स जोधपुर में मरीजों के सैंपल पर इस दवाई का परीक्षण किया जाएगा।

कॉमन लैंचहैड एक जहरीला सांप है। इसके जहर में 38 अमीनो एसिड (प्रोटीन की कार्यात्मक इकाई) की एक पेप्टाइड श्रंखला (प्रोटीन-प्रोटीन के मध्य बंध) होती है। आईआईटी जोधपुर ने इसमें 15 से 26 सीरिज यानी कुल 11 अमीनो एसिड की श्रृंखला को दवाई के लिए चुना। इससे जहर का जहरीला पार्ट पीछे टूट गया। चुनी गई पेप्टाइड श्रृंखला में जो जहरीलापन बचा था उसे फाइन टेनिन द्वारा दूर किया गया। इसमें मेंढक में पाई जाने वाली कुछ प्रोटीन श्रृंखला भी जोड़ी गई।

चूहों में डायबिटीज का घाव जल्दी ठीक
सांप के जहर से बनी इस दवाई का परीक्षण डायबिटीज से ग्रसत चूहे पर किया गया। दवाई से चूहे का घाव तेजी से भर दिया। सामान्यत: डायबिटीक रोगी में घाव मुश्किल से भरता है।
हॉस्पीटल बोर्न बैक्टिरियां को भी मारेगा

बैक्टिरिया की कोशिका भित्ति काफी मोटी होती है। इसको काटने के लिए बेहतर रासायनिक यौगिक की जरुरत पड़ती है। वर्तमान में कई एंटीबायोटिक दवाइयाें के प्रति बैक्टिरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती जा रही है। इसको देखते हुए आइआइटी का शोध मील का पत्थर साबित होगा। यह सामान्य बैक्टिरिया के अलावा हॉस्पीटल बोर्न बैक्टिरियां को भी मारने में सक्षम है।

इन्होंने किया शोध
आईआईटी के बायोसाइंस व बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ सुरजीत घोष के नेतृत्व में डॉ. साम्या सेन, रामकमल समत, डॉ. मौमिता जश, सत्यजीत घोष, राजशेखर रॉय, नबनिता मुखर्जी, सुरोजीत घोष और डॉ. जयिता सरकार ने शोध किया।

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सांप के जहर से बना यह यौगिक प्रकृति में पाए जाने वाले कई हानिकारक बैक्टिरिया को मारने में सक्षम है। अगला प्रयोग एम्स जोधपुर के मरीजों के नमूनों पर किया जाएगा।
डॉ सुरजीत घोष, बायोसाइंस विभाग, आईआईटी जोधपुर