
230 साल पुराना है जोधपुर का कुंज बिहारी मंदिर
जोधपुर. देवस्थान विभाग की ओर से प्रबंधित पुष्टिमार्गीय परम्परा से जुड़ा शहर का सर्वाधिक ख्यातनाम कृष्ण मंदिर कुंज बिहारी 230 साल प्राचीन हैं। विक्रम संवत 1847 (सन् 1790) में जोधपुर के तत्कालीन महाराजा विजयसिंह की पासवान (उप पत्नी) गुलाब राय ने कुंज बिहारी मंदिर बनवाया था। हर तीज त्योहार व जन्माष्टमी मंदिर में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते मंदिर बंद है। उत्सव केवल पुजारियों की ओर से ही मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी 12 अगस्त को ठाकुरजी का विशेष शृंगार, अभिषेक होगा।
अनूठे कलात्मक भित्ति चित्र
मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर नाथद्वारा चित्रशैली के अनूठे कलात्मक भित्ति चित्र हैं। चित्रों में भगवान कृष्ण व राम के जीवन प्रसंग का वर्णन सजीवता से किया गया हैं। प्राकृतिक रंगों से बने चित्रों में देवकी-वासुदेव विवाह, कृष्ण रास प्रसंग, गीता उपदेश, कृष्ण-सुदामा सखा भाव, गजेन्द्र मोक्ष आदि भागवत प्रसंग बखूबी दीवारों पर उकेरे हुए हैं। सभी चित्र राम व कृष्ण दोनों की लीलाओं की झांकी का दिग्दर्शन कराती हैं। मंदिर के महंत भंवरदास निंरजनी ने बताया कि मंदिर में मुख्य स्वरूप श्रीनाथजी का है।
एक ही शिलाखंड से बना है तोरणद्वार
ऐसा कहा जाता है कि कुंज बिहारी की प्रतिमा कबूतरों का चौक स्थित सीताराम मंदिर से लाकर स्थापित की गई थी। मंदिर का विशाल शिखर एवं तोरणद्वार स्थापत्य कला के उत्कृष्टतम नमूने है। तोरणद्वार की विशेषता है कि एक ही शिलाखंड को तराश कर बनाया गया हैं। मंदिर में महालक्ष्मी, गायत्री, गणपति, सरस्वती, संतोषी माता, राम, निंबकाचार्य, अजनेश्वर, रामानुजाचार्या व गुरु रामानंद एवं निरंजनी सम्प्रदाय के प्रवर्तक हरि पुरुष दयाल की प्रतिमाएं भी हैं।
Published on:
09 Aug 2020 12:24 am

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