10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संत ललितप्रभ सागर ने कहा कि संवत्सरी विश्व मैत्री का पवित्र पर्व है

जोधपुर. राष्ट्र संत ललित प्रभ सागर ( Rashtrasant Mahopadhyay Lalitprabh Sagar ) ने कहा कि संवत्सरी ( Samvatsari Parva Festival ) विश्व मैत्री का पवित्र पर्व ( festival of world friendship ) है। गलती सुधारने वाला इंसान जीवन मधुर बना देता है। वे सोमवार को गांधी मैदान ( Gandhi Maidan ) में पर्युषण पर्व ( paryushan ) के आठवें दिन हजारों श्रद्धालुओं को संवत्सरी का रहस्य व आलोयणा’ विषय पर संबोधित कर रहे थे। इस मौके सैकड़ों भाई-बहनों ने सामूहिक प्रतिक्रमण कर एक-दूसरे के पैरों में झुक कर क्षमायाचना की।        

2 min read
Google source verification

जोधपुर

image

MI Zahir

Sep 02, 2019

Saint Lalitprabh Sagar said that the Samvatsari is a holy festival of world friendship

Saint Lalitprabh Sagar said that the Samvatsari is a holy festival of world friendship

जोधपुर. राष्ट्र संत ललित प्रभ सागर ( Rashtrasant Mahopadhyay Lalitprabh Sagar ) ने कहा कि संवत्सरी ( Samvatsari Parva Festival ) विश्व मैत्री का पवित्र पर्व ( festival of world friendship ) है। गलती सुधारने वाला इंसान जीवन मधुर बना देता है। वे सोमवार को गांधी मैदान ( Gandhi Maidan ) में पर्युषण पर्व ( paryushan ) के आठवें दिन हजारों श्रद्धालुओं को संवत्सरी का रहस्य व आलोयणा’ विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह भाई-भाई, सास-बहू, देराणी-जेठाणी, पिता-पुत्र और पड़ोसी-पड़ोसी को आपस में बन चुकी दीवारें हटा कर निकट आने की प्रेरणा देता है। जो व्यक्ति संवत्सरी पर्व मनाने के बावजूद मन में किसी के प्रति वैर-विरोध या थोड़ी-सी भी प्रतिशोध की भावना रखता है, उसके सारे धर्म-कर्म-पुुण्य निष्फल हो जाते हैं। धर्म की नींव है टूटे हुए दिलों को जोडऩा व जुडऩा है।


संत प्रवर ने कहा कि अपरिचित व्यक्ति से क्षमायाचना करना आसान है, पर आपस में कोर्ट केस चलने वाले दो लोगों के द्वारा आपस में क्षमायाचना करना तीस उपवास करने से भी बड़ी तपस्या है। हमसे उससे क्षमा मांगें जिससे हमारी बोलचाल नहीं है, ऐसा करना मिच्छामी दुक्कड़म के पत्र या एसएमएस करने से भी ज्यादा लाभकारी होगा। भगवान को आपके लड्डू, फल व मिठाइयां या रुपये नहीं, मन में पलने वाले अहंकार, गुस्सा और ईष्र्या और बैर-विरोध की गांठें चाहिए, ताकि वह आपको पापों से मुक्त कर सके।

उन्होंने कहा कि रूप, धन, पद या उम्र से व्यक्ति बड़ा नहीं होता। बड़ा वही है जो माफी मांगने के लिए दो कदम आगे बड़ा देता है। उन्होंने वर्ष भर में हो चुके हिंसा, झूठ, चोरी, दुशील, परशोषण, ज्ञान व ज्ञानियों की आशातना, परमात्मा का अनादर, दूसरों का दिल दुखाना और क्रोध,मान, माया, लोभ के वशीभूत होकर हो चुके दुष्कृत्यों की सबको मिच्छामि दुक्कड़म करवाया। इस अवसर पर जीवाराम जांगिड़ परिवार ने राष्ट्र-संतों को कल्पसूत्र आगम समर्पित किया। समारोह में जोधपुर के पूर्व सांसद गजसिंह ( maharaja gajsingh ) ने संवत्सरी पर्व पर गांधी मैदान में राष्ट्र-संतों का आशीर्वाद लिया। उन्होंने दीप-प्रज्जलन करके समारोह का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर गांधी मैदान में हुए चातुर्मास में विशिष्ट कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया गया। जब महापौर घनश्याम ओझा ( mayor ghanshyam ojha ) का गांधी मैदान में प्रदत्त सेवाओं के लिए अभिनंदन किया गया तो श्रद्धालुओं ने खड़े होकर तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। समारोह में मंगलायतन भवन के अध्यक्ष दशरथमल सर्राफ का चातुर्मास समिति ने अभिनंदन किया। पूर्व पार्षद ओमकार वर्मा, जितेन्द्र गहलोत, राकेश श्रीवास्तव व गजेन्द्र सिंघवी का भी विशिष्ट सेवाओं के लिए अभिनंदन किया गया। कैसे पाएं चिंता एवं क्रोधमुक्त जीवन’ पुस्तक का विमोचन पूर्व सांसद गजसिंह ( Former MP gajsingh ) , चातुर्मास लाभार्थी सुखराज-नीलम मेहता, सुरेश गांधी ने किया। संबोधि धाम के सचिव स्वरूपचंद बच्छावत ने बताया कि मंगलवार को राष्ट्र-संतों के सान्निध्य में दूसरी संवत्सरी की आराधना करते हुए सामूहिक आलोयणा की जाएगी।