बहुत कम लोगों को पता है कि Lata Mangeshkar ने पहला पार्श्वगीत गीत सन् 1947 में आई फिल्म 'आपकी सेवा में' गाया था। इसके बोल ‘पा लागूं कर जोरी रे...’ जोधपुर के जाए जन्मे प्रख्यात अभिनेेता महिपाल ने लिखे थे। कई मशहूर फिल्मों में काम करने वाले महिपाल कवि भी थे और उनका काव्य संग्रह भी प्रकाशित हुआ था।
जोधपुर। सुर सम्राज्ञी #Lata Mangeshkar का राजस्थान से गीत-संगीत के मामले में लम्बा वास्ता होने की बात तो जाहिर है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि लता दीदी ने जो पहला पाश्र्वगीत गाया था, उसे जोधपुर के जाए जन्मे प्रख्यात अभिनेता महिपाल ने लिखा था। महिपाल फिल्मों में अभिनय के साथ गीत व कविताएं भी लगातार लिखते रहे थे।
फिल्मी गीतों का खजाना रखने वाले इंडियन म्यूजिक आर्काइव्स एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक गिरधारीलाल विश्वकर्मा बताते हैं कि लता ने पहला पाश्र्व गीत 1947 में बनी फिल्म ‘आपकी सेवा में’ गाया था। गीत के बोल ‘पा लागूं कर जोरी रे...’ जोधपुर के महिपाल ने लिखे थे। इस गीत को दत्ता डावजेकर ने संगीतबद्ध किया था। इसी फिल्म में लता ने महिपाल का लिखा और डावजेकर का संगीतबद्ध एक और गीत ‘एक नये रंग में...’ भी गाया था।
विश्वकर्मा बताते हैं कि जोधपुर के ही एक अन्य गीतकार एस.पी. कल्ला के 1956 में आई फिल्म ‘हरि हर भक्ति’ में लिखे गीतों को भी लताजी ने स्वर दिए थे। इनमें ‘आखों में आसूं जीया में...’ व ‘चंदा का रंग लिये...’ गीत थे। चंदा का रंग गीत में लता के साथ तलत महमूद की भी आवाज है। इन दोनों गानों को संगीत दत्ता कोरगांवकर ने दिया था।
संगीतकार भी जोधपुर के
लताजी ने जोधपुर में रहे संगीतकार पंडित शिवराम के संगीतबद्ध किए गए कई फिल्मी गीतों को भी अपने स्वरों में पिरोया था। पंडित शिवराम ख्यातनाम संगीतज्ञ अली अकबर खां के शागिर्द थे और उन्होंने जोधपुर रहकर खां साहब की सरपरस्ती में संगीत की खूब सेवा की थी। पंडित शिवराम ने सुरंग, तीन बत्ती चार रास्ता व जय अम्बे फिल्मों में संगीत दिया था। इन फिल्मों का पाश्र्वगायन लताजी ने किया। इसके अलावा जुगलकिशोर-तिलकराज के संगीत में फिल्म भीगी पलकें और बीएस कल्ला के संसार, दो दूल्हे व बहुत दिन हुए फिल्मों में संगीतबद्ध गीतों में भी लताजी की आवाज होने की जानकारी इंडियन म्यूजिक आर्काइव्स एंड रिसर्च सेंटर में सहेजी हुई है।