जोधपुर. किताबें झांकती है बंद अलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती है, महीनों अब मुलाकातें नहीं होती…गुलजार की ये पंक्तियां इन दिनों यहां जेएनवीयू के न्यू कैम्पस स्थित सेन्ट्रल लाइब्रेरी पर सटीक बैठ रही है। यहां किताबें इन दिनों खामाशी की चादर में लिपटी शायद यों कह रही है कि छुपी है अनगिनत कहानियां इन लफ्जों के दामन में…जरा पढऩा, हमारी भावनाओं की किताब आहिस्ता-आहिस्ता…। विवि की जिस लाइब्रेरी में बैठकर देश के नामी साहित्यकारों, प्रबुद्धजनों ने ज्ञान अर्जित किया था, वह लाइब्रेरी इन दिनों नि:शब्द है क्योंकि हाल बेहाल है। न केवल किताबें बल्कि छत व दीवारें भी अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। कहने को यहां करीब तीन लाख बुक्स हैं लेकिन कई पानी से इस तरह खराब हुई है कि पलटते ही पन्ने बिखरने शुरू हो जाते हैं।
अब कैसे पढ़ें स्टूडेंट्स
एेसा भी नहीं है कि यहां किताबें स्टूडेंट्स पढऩा नहीं चाहते हैं, लेकिन दुविधा यह है कि बुक्स के कवर से लेकर पेज तक फट गए हैं। जरा सी बारिश में ही विवि की लाइब्रेरी में पानी टपकना शुरु हो जाता है।
छत पर दरारें
लाइब्रेरी में बने शौचालय के हालात विकट है। बरसों से यहां मरम्मत के नाम पर धेले का कार्य भी नहीं किया गया। शौचालय की छत व भीम में दरारें आ जाने से कभी भी गिर सकता है। इसके अलावा लाइब्रेरी की दीवारें, टाइल्स आदि भी अपने वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
कैमरे खराब
लाइब्रेरी में भले ही लाखों खर्च करके पुस्तकों के डेटा के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए सोल सवर्र लगाए गए हैं, लेकिन लाइट गुल होने पर वे भी दिन में आधे समय बंद ही रहते हैं। यहां लगा जनरेटर भी खराब ही है। यही हाल लाइब्रेरी में लगे कैमरे के भी हैं। जो लम्बे समय से बंद ही पड़े हैं। इससे गल्र्स की सेफ्टी को लेकर भी इंतजाम नहीं है।
इनकी भी सुनो
मैने हाल ही में चार्ज संभाला है। लाइब्रेरी की जर्जर हालात को लेकर कई बार कुलपति व बिल्डिंग सेल को लेटर लिखें हैं। उम्मीद है जल्द ही स्वीकृति मिलते ही मरम्मत का कार्य शुरु करवा दिया जाएगा। इसके अलावा विवि में खराब पड़े कैमरों को भी जल्द शुरू किया जाएगा।
पीके कसेरा, चैयरेमन लाइब्रेरी बोड