
अब जंगलों के बीच बहेगी थार की गंगा, लूणी नदी के जीर्णोद्धार के लिए करीब 650 करोड़ की डीपीआर तैयार
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. पश्चिमी राजस्थान की गंगा, लूणी नदी का अगले 5 साल में कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) की ओर से तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। डीपीआर में लूणी नदी के जीर्णोद्धार पर करीब 650 करोड रुपए का खर्च प्रस्तावित है।
लूणी नदी अजमेर के नाग पहाड़ से निकल कर अजमेर, नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर में बहती हुई गुजरात में कच्छ की खाड़ी में गिरती है। नदी की लंबाई 511 किलोमीटर है। आफरी ने नदी के दोनों तरफ पांच 5 किलोमीटर के क्षेत्र में वनीकरण का सुझाव दिया गया है, ताकि मृदा और जल संरक्षण, भू जल संवर्धन और अन्य वानिकी कार्यों को बढ़ावा दिया जा सके। नदी के दोनों ओर की भूमि वन विभाग के अलावा समुदायिक भूमि और कुछ किसानों की जमीन है जिसे अवाप्त किया जाएगा।
किसानों को जलवायु के अनुसार उद्यानिकी के पौधे लगाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मिट्टी का कटाव रोकने का प्रबंध भी किया जाएगा। जोजड़ी, मीठड़ी, सुकड़ी, खारी, बांडी सहित लूनी नदी की कुल 8 सहायक नदियों के दोनों तरफ 2-2 किलोमीटर के क्षेत्र में वन लगाए जाएंगे। ओरण और गोचर भूमि को उपचारित किया जाएगा। जोधपुर, पाली, बालोतरा सहित कुछ शहर व कस्बों में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और इको पार्क डेवलपमेंट जैसे कार्यक्रम भी होंगे।
गंगा की तर्ज पर हो रहा 13 नदियों का उद्धार
केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय की ओर से गंगा की तर्ज पर देश की 13 प्रमुख नदियों का जीर्णोद्धार का कार्य हाथ में लिया गया है। इसमें राजस्थान से लूणी नदी के अलावा यमुना, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, सतलज, व्यास, रावी, चिनाब और झेलम है। सभी 13 नदियों की डीपीआर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आइसीएफआरइ) को सौंपी जाएगी।
इस सप्ताह भेज देंगे डीपीआर
लूनी नदी की डीपीआर इसी सप्ताह आइसीएफआरइ को भेज दी जाएगी। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद लूणी के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया जाएगा।
- डॉ, जी सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, आफरी जोधपुर
Published on:
02 Jan 2020 12:55 pm
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