
गढ़ जोधाणे ऊपरे, है बैठी पंख पसार । अम्बा थारो आसरो, तू हीज है रखवार ।।

चावण्ड थारी गोद में, खेल रयो जोधाण । तू ही निंगे राखजे, थारा टाबर जाण ।।

रूप अगर हो देखणो देखो यां की ओर आ म्हारा मेहरानगढ़, आ म्हारा मंडोर..।

इस शहर पर मां चामुंडा का आशीष है

और सूरज का यह शहर उनकी आभा से दमक रहा है।

नवरात्र पर मेहरानगढ़ दुर्ग की स्थित चामुंडा माता मंदिर के निकट प्राचीर से लिया गया शहर का विहंगम द़ृश्य।

इसमें परकोटे की पचेटिया हिल भी दिखाई दे रही है तो नया बसा विस्तार के बाद दूर दूर तक फैला हुआ जोधपुर भी नजर आ रहा है।