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महाश्वेतादेवी का राजस्थान कनेक्शन, राजस्थानी कहानी पर बनी थी फिल्म रुदाली

बंगाली की मशहूर साहित्यकार महाश्वेतादेवी राजस्थानी संस्कृति से प्रभावित थीं। उनकी राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित रुदाली कहानी पर कल्पना लाजमी ने रूदाली फिल्म बनाई थी। फिल्म उस समय बहुत चर्चित रही थी। यह फिल्म जोधपुर के ऑलंपिक सिनेमा में लगी थी।

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Harshwardhan Singh Bhati

Jul 30, 2016

mahasweta devi

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बंगाली की मशहूर साहित्यकार महाश्वेतादेवी अपने लेखन के लिए किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। महाश्वेतादेवी ने राजस्थान की पृष्ठभृूमि पर रुदाली कहानी लिख कर अपनी कलम का जादू जगाया था।

निर्देशक कल्पना लाजमी ने उसी कहानी पर यह सन 1993 में रुदाली नाम मार्मिक फिल्म बनाई थी। फिल्म का गीत दिल हुम हुम करे ...गीत मशहूर है। गुलजार के गीत, भूपेन हजारिका के संगीत और लता की आवाज में सजा यह गीत महाश्वेतादेवी की याद दिलाता है।

इस फि ल्म को 66 वं अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फि ल्म के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में चुना गया था। फिल्म में डिंपल कपाडिय़ा ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। राखी गुलज़ार, राज बब्बर और अमजद खान ने भूमिका निभाई थी।

फि ल्म रिलीज होने से पहले ही अमजद खान की मृत्यु हो गई थी। इसके समीर चंदा को सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फि ल्म पुरस्कार मिला था। वहीं सिम्पल कपाडिय़ा सर्वश्रेष्ठ कॉस्टयूम डिजाइन के लिए राष्ट्रीय फि ल्म पुरस्कार मिला था।

यह फिल्म उस समय जोधपुर के ऑलंपिक सिनेमा में लगी थी। यह छवि गृह अब बंद चुका है हो। फिल्म के सेट दर्शकों के अलावा आम तौर पर फिल्म कम देखने वाले मारवाड़ के लोग भी यह फिल्म देखने गए थे।


हालांकि उस समय इस विषय पर राजस्थान के एक वर्ग, साहित्यकारों व रंगकर्मियों में खासी बहस छिड़ी थी।

ध्यान रहे कि महाश्वेता देवी का नाम आते ही जेहन व आंखों में उनकी कई छवियां प्रकट हो जाती हैं।


दरअसल उन्होंने लेखन की मेहनत व ईमानदारी के बलबूते अपना व्यक्तित्व निखारा।

यह है रुदाली
एेसी मान्यता रही है कि पहले के जमाने में पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में उच्च श्रेणी के पुरुष के निधन पर एक विशेष वर्ग की महिलाओं को रोने के लिए बुलाया जाता था। रोने के बदले उन्हें अनाज और कुछ रुपए दिए जाते थे। एेसा कहा जाता है कि गांव वालों को निधन की सूचना देने का माध्यम भी माना जाता था।