
mahasweta devi
निर्देशक कल्पना लाजमी ने उसी कहानी पर यह सन 1993 में रुदाली नाम मार्मिक फिल्म बनाई थी। फिल्म का गीत दिल हुम हुम करे ...गीत मशहूर है। गुलजार के गीत, भूपेन हजारिका के संगीत और लता की आवाज में सजा यह गीत महाश्वेतादेवी की याद दिलाता है।

यह फिल्म उस समय जोधपुर के ऑलंपिक सिनेमा में लगी थी। यह छवि गृह अब बंद चुका है हो। फिल्म के सेट दर्शकों के अलावा आम तौर पर फिल्म कम देखने वाले मारवाड़ के लोग भी यह फिल्म देखने गए थे।
ध्यान रहे कि महाश्वेता देवी का नाम आते ही जेहन व आंखों में उनकी कई छवियां प्रकट हो जाती हैं।
यह है रुदाली
एेसी मान्यता रही है कि पहले के जमाने में पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में उच्च श्रेणी के पुरुष के निधन पर एक विशेष वर्ग की महिलाओं को रोने के लिए बुलाया जाता था। रोने के बदले उन्हें अनाज और कुछ रुपए दिए जाते थे। एेसा कहा जाता है कि गांव वालों को निधन की सूचना देने का माध्यम भी माना जाता था।
Published on:
30 Jul 2016 12:28 pm
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