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संतों की तपोस्थली रहा है जोधपुर का मंडलनाथ, यहां स्थापित है स्वयंभू शिवलिंग

जोधपुर. शहर से करीब 23 किमी दूर पालड़ी गांव में भोगिशैल पहाडिय़ों में स्थित मंडलेश्वर महादेव मंदिर संतों की तपोस्थली रहा है। जोधपुर शहर में हर तीसरे साल पुरुषोत्तम मास में होने वाली भोगिशैल परिक्रमा का महत्वपूर्ण पड़ाव स्थल मंडलनाथ भी है।

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संतों की तपोस्थली रहा है जोधपुर का मंडलनाथ, यहां स्थापित है स्वयंभू शिवलिंग

जोधपुर. शहर से करीब 23 किमी दूर पालड़ी गांव में भोगिशैल पहाडिय़ों में स्थित मंडलेश्वर महादेव मंदिर संतों की तपोस्थली रहा है। जोधपुर शहर में हर तीसरे साल पुरुषोत्तम मास में होने वाली भोगिशैल परिक्रमा का महत्वपूर्ण पड़ाव स्थल मंडलनाथ भी है। मंडलनाथ मंदिर स्थापना के बारे में दो मत हैं। एक मत नैणसी मुणोत की ख्यात के अनुसार यह स्वयंभू शिवलिंग प्राचीन है। शिवदत्त महाराज के ग्रंथ ‘गुरुवाक-सुधा’ में एक पद में कहा गया है कि मंडल ऋषि ने विक्रम संवत 988 में शिवलिंग की स्थापना की, जिससे मंदिर का नाम मंडलनाथ पड़ा था। मंदिर तक मंडोर दईजर और दूसरा मार्ग सूरसागर काली बेरी होते हुए पहुंचा जा सकता है। मंदिर में मांडव्य ऋषि के अलावा क्षोत्रीय ब्रह्मानंद, वनस्थ योगीराज, शिवदत्त महाराज सहित कई संतों ने तपस्या की है। मंडलनाथ मंदिर का प्रबंधन दशकों से पुष्करणा ब्राह्मणों की ओर से किया जाता रहा है। चैत्र माह की कृष्ण त्रयोदशी को मंडलनाथ में मेले का आयोजन होता है। निज मंदिर में ज्योतिर्लिंग के साथ पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और नंदी के विग्रह हैं। श्रावण मास में कई भक्त पूरे एक माह तक मंदिर में रहकर शिवाराधना में लीन रहते है। शिवरात्रि, होली, दीपावली, मंदिर पाटोत्सव, मंडलनाथ मेले के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है।