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मेहरानगढ़ की रक्षा के लिए शहीद वीर गुमान सिंह को मिला मान

  जोधपुर जिले के तिंवरी गाँव में बना शौर्य स्मारक, हाट बाजार भी अब वीर के नाम से
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जोधपुर

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Nandkishor Sharma

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Updated: 30 Jun 2022, 11:50 AM IST

मेहरानगढ़ की रक्षा के लिए शहीद वीर गुमान सिंह को मिला मान

मेहरानगढ़ की रक्षा के लिए शहीद वीर गुमान सिंह को मिला मान

जोधपुर - मारवाड़ की आन बान और शान का प्रतीक माने जाने वाले विश्वविख्यात मेहरानगढ़ दुर्ग की रक्षार्थ अपने प्राणों की आहुति देने वाले जोधपुर जिले के तिंवरी गांव के वीर गुमान सिंह राजपुरोहित का शौर्य स्मारक पैतृक गांव तिंवरी में तहसील भवन के सामने बने चौक में बन कर तैयार हो गया है जो कि आने वाली पीढ़ियों व क्षेत्रवासियों को त्याग बलिदान वीरता की प्रेरणा देगा।, साथ ही चौक में बने हाट बाजार का नामकरण भी वीर गुमान सिंह के नाम से किया गया है अब यह हाट बाजार वीर गुमान सिंह चौक के नाम से जाना जाएगा। स्मारक का निर्माण
राजपुरोहित अखेराजोत परिवार ने करवाया है ।इस अवसर पर वीर गुमान सिंह के परिवारजनों ने ग्राम पंचायत तिंवरी के सरपंच अचल सिंह गहलोत सहित पूरी ग्रामपंचायत का आभार व्यक्त किया है।

एक परिचय वीर गुमान सिंह का

तिंवरी के ठिकानेदार राजपुरोहित सेवड़ रण सिरमौड़ अनवी अखेराजोत वीर गुमान सिंह वीर दौलत सिंह के पुत्र थे ।इन की राज्य सेवाएँ मारवाड़ के महाराजा विजय सिंह से लेकर महाराजा मान सिंह के समय तक रही। यह अपने वंश के वीरोचित गुणों के कारण मारवाड़ के महाराजाओं के अति विशिष्ट एवं विश्वास पात्र सरदारों में शुमार रहे। वि.सं. 1872 आसोज सुदी अष्टमी को नवाब मीर खां पठान की सेना मेहरानगढ़ किले पर पहुची थी। इस दौरान तिंवरी के वीर गुमान सिंह भी गोली लगने से घायल हो गए फिर भी अपनी वीरता व साहस का परिचय देते हुए अपने कमर पर बंधी कटार निकालकर दुश्मनो पर अकेले ही टूट पड़े और मुख्य हमलावर को मौत के घाट उतार बदला लिया। थक हारकर दुश्मनो को पीछे हटना पड़ा । इस दौरान वीरता पूर्वक युद्ध करते हुए किले की रक्षार्थ वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी वीरता और स्वामीभक्ति को देख महाराजा मानसिंह भावविभोर हो गए तथा उनका दाह संस्कार गढ़ की तलहटी पर स्थित रासोलाई नाडी पर करवाया। जहाँ बना स्मारक आज भी गुमान सिंह के शौर्य, स्वामीभक्ति तथा वीरता का यशोगान करता है।