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Video: मारवाड़ की चर्चित कलाकार नूतन गहलोत ने चर्चा में खोले कई राज

वाकिफ कहां था जमाना हमारी उड़ान से मेहनत से किया मुकाम हासिल

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Video: मारवाड़ की चर्चित कलाकार नूतन गहलोत ने चर्चा में खोले कई राज

Video: मारवाड़ की चर्चित कलाकार नूतन गहलोत ने चर्चा में खोले कई राज

जोधपुर. ‘वाकिफ कहां था जमाना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमां से’, कुछ इसी ही लक्ष्य के साथ काम करते हुए राजस्थानी म्यूजिक इंडस्ट्री में विशिष्ठ पहचान बनाई है नूतन गहलोत ने। अब तक राजस्थानी विवाह गीत से लेकर हजारों भजन, गानों में अभिनय कर चुकी नूतन की एक्टिंग का असर ही है कि लोगों की जुबां पर इनका ही नाम छाया रहता है। एक्टिंग की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में राजस्थानी फिल्म एवं लव स्टोरी बेस म्यूजिक एलबम में काम कर रही है। इसी सिलसिले में उन्होंने ‘पत्रिका’ के साथ बातचीत में कई राज खोले-

ट्रेडिंग पर रहा था पहला वीडियो

नूतन अब तक 1 हजार से भी अधिक म्यूजिक एलबम में अपनी परफोर्मेंस से जलवा बिखेर चुकी है। इनमें से ज्यादातर वह वीडियो हैं जो यूट्यूब पर कई मिलियंस व्यूज प्राप्त कर चुके हैं। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक म्यूजिक एलबम में भी सिंगिंग कर प्रसिद्धि पाई। इनमें वीणा, टी सीरीज जैसी नामी कंपनियां भी शामिल हैं। नूतन ने बताया कि बाबा रामदेव एलबम से शुरुआत हुई। उन दिनों राजस्थानी गाने ट्रेंडिंग में नहीं थे, मामी-नाणदा गाना मारवाड़ का पहला ऐसा गाना था जो यूट्यूब पर जबरदस्त ट्रैंड में रहा।

ड्रेसअप सेंस ने दिलाई पहचान

मुझे राजस्थानी की टे्रडिशनल लुक बेहद अच्छा लगता है। इंडस्ट्री में कदम रखा तो इसी थीम के साथ कार्य करना शुरू किया। यही वजह थी की लोगों को मेरा ड्रेसअप सेंस बेहद पसंद आया। इसके चलते नई पहचान मिली। ड्रेसअप सेंस के चलते ही कई विज्ञापन, शॉर्ट फिल्म, वीडियो में ऑफर आने लगे। नए कलाकार भी इसे फॉलो करने लगे। वहीं इस फील्ड के संघर्ष के बारे में कहा कि हारना मेरी फितरत में नहीं था। इसलिए एक समय ऐसा भी आया, जब कई लोगों ने मेरा साथ छोड़ दिया। मैंने जिनकी मदद की, उन्होंने भी किनारा कर लिया, लेकिन हार नहीं मानी।

अपने फैसले पर गर्व

नूतन ने बताया कि उनका लक्ष्य बचपन से ही इस फील्ड में जाना था। आज से 15 वर्ष पूर्व महिलाओं का इस इंडस्ट्री में आना आसान काम नहीं था। क्योंकि नारी होने के चलते कई जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी जरुरी था, लेकिन इन सबके बीच घरवालों खास तौर पर पिता के सहयोग ने सामंजस्य बिठाया। इसी के चलते इस इंडस्ट्री में कदम रखा। प्रथम बार गुरु हरीशपुरी नागा ने मंच दिया। इसके बाद काम मिलता गया। राज्य व इससे बाहर प्रवासी राजस्थानियों के कार्यक्रम में जहां भी परफोर्म के लिए गई वहां लोगों से खूब सारा सपोर्ट मिला।