
कॉलेज में पढऩे वाली सभी महिला छात्राओं को अब मातृत्व अवकाश
गजेन्द्र सिंह दहिया
जोधपुर. महिला सशक्तिकरण की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बड़ा कदम उठाते हुए अब देश के कॉलेजों में पढऩे वाली स्नातक और स्नातकोत्तर महिला छात्राओं को मातृत्व अवकाश देने का निर्णय किया है। इसके लिए यूजीसी ने मंगलवार को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को पत्र लिखा है। हालांकि मातृत्व अवकाश कितने दिन का रहेगा, इस पर कोई निर्णय नहीं किया गया है। यूजीसी ने सभी कॉलेजों को महिला छात्राओं के लिए उपस्थिति, परीक्षा आवेदन पत्र भरने में छूट संबंधी अन्य कई सुविधाएं देने के निर्देश दिए हैं।
यूजीसी ने चार साल पहले यूजीसी मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसीजर फॉर अवार्ड ऑफ एमफिल/पीएचडी डिग्री रेगुलेशन:2016 के तहत एमफिल और पीएचडी करने वाली महिला छात्राओं को अपने अध्ययन काल के दौरान अधिकतम 240 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्णय किया था। अब इसी संदर्भ में एक कदम और आगे बढ़ते हुए कॉलेज में पढऩे वाली समस्त महिला छात्राओं के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा देने की घोषणा की है।
कॉलेज व विवि को बनाने होंगे नियम
यूजीसी ने देश के समस्त उच्च शिक्षा संस्थानों को इस संदर्भ में नियम बनाने को कहा है। कॉलेज, विवि, आइआइटीज, एम्स सहित तमाम शिक्षण संस्थान अपने स्तर पर महिला छात्राओं को मातृत्व अवकाश देने और अध्ययन में अन्य रियायत देने संबंधी नियम बनाएंगे। मातृत्व अवकाश के दौरान किसी भी महिला छात्रा को पढ़ाई में नुकसान नहीं होगा। मातृत्व अवकाश होने के चलते उनकी परीक्षाएं और उपस्थिति भी सामान्य विद्यार्थियों से अलग गिनी जाएगी।
कामकाजी महिलाओं को 182 दिन का मातृत्व अवकाश
देश में मातृत्व अवकाश एक्ट 1961 में बना था। तब महिलाओं को मातृत्व अवकाश के तौर पर केवल 84 दिन की पैड लीव यानी वेतन के साथ छुट्टी मिलती थी। वर्ष 2017 में इस एक्ट में संशोधन करके मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह (182 दिन) का कर दिया गया है। पहले से ही दो बच्चे होने पर उसको 12 सप्ताह का ही अवकाश मिलेगा।
..........................
‘महिला होने के नाते मातृत्व अवकाश उसका अधिकार है। ऐसे मामले सामने आने पर नियम बनाए जाएंगे।’
-प्रो संगीता लुंकड़, निदेशक, कमला नेहरु महिला महाविद्यालय जोधपुर
Published on:
16 Dec 2021 05:25 pm
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
