
ट्रोमा एंड इमरजेंसी सेंटर में जिंदगी बचाने की मशीन खराब, मरीजों के दिल पर भारी पड़ रही अस्पताल की लापरवाही
जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में इन दिनों डिसीब्रिलेएटर मशीन खराब है। इस मशीन के जरिए कार्डियक अरेस्ट के गंभीर रोगियों को शॉक दिया जाता हैं। ट्रोमा सेंटर जैसी जगह पर गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए पास के अन्य वार्डों व इमरजेंसी यूनिट से मशीन लानी पड़ रही है, जबकि कार्डियक अरेस्ट के दौरान मरीजों को विशेषकर डीसी शॉक मशीन की सख्त आवश्यकता रहती है। यह मशीन लगभग डेढ़-दो माह से खराब है, जबकि आपातकाल के दौरान ज्यादातर लोग भी एमडीएम के ट्रोमा इमरजेंसी में आते हैं। ऐसे में अस्पताल पास के ट्रोमा आइसीयू सहित आसपास से डीसी शॉक मशीन का इंतजाम कर रहा है।
इस समय काम आती है मशीन
दिल की घातक बीमारियों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट मुख्य रूप से शामिल है। हार्ट अटैक के दौरान बचने की संभावनाएं काफ ी अधिक होती हैं, लेकिन कार्डियक अरेस्ट के दौरान मौके बेहद कम हैं। समय रहते अगर मरीज को उपचार नहीं मिलता है तो मरीज की जान चली जाती है। अस्पताल में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन) प्रक्रिया से आपातकाल के दौरान कार्डियक अरेस्ट के शिकार मरीज को बचा लेते हैं, ताकि ब्रेन को ऑक्सीजन मिल जाए। कई बार सीपीआर के बाद इलेक्ट्रिक शॉक की जरूरत होती है, जिसके लिए डिसीब्रिलेटर मशीन की जरूरत होती है। इसका समय पर उपलब्ध न होना मरीज की जान पर भारी पड़ जाता है।
इनका कहना है
अभी एक मशीन ट्रोमा इमरजेंसी व ट्रोमा आइसीयू के बीच कॉमन है। वैसे दूसरी मशीन एक-दो दिन में सही हो जाएगी।
- डॉ. एमके आसेरी, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल
Published on:
14 Aug 2019 03:43 pm
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