
bajra hybrid
जोधपुर।
मण्डोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में विकसित बाजरा की हाइब्रिड बीज की नई किस्म किसानों को राहत देने वाली साबित हो रही है। विवि में तैयार बाजरा की एमपीएमएच-17 किस्म पौष्टिकता व गुणवत्ता के कारण किसानों को मालामाल कर देगी। साथ ही, नई किस्म में आयरन व जिंक तत्वों की अधिकता पाई जाती है, जो कुपोषण को समाप्त करने में कारगर होगी। किसानों की रूचि, मांग व उन्नत पैदावार को देखते हुए विश्वविद्यालय इस बार 200 क्विंटल हाइब्रिड बाजरा के बीज पैदा करेगा। यह किस्म पश्चिमी राजस्थान के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अधिक उत्पादन देने में सक्षम है। इस किस्म का सिट्टा बालोंयुक्त तथा दाना पीला-भूरा गोलाकार होता है, जो खाने में स्वादिष्ट होता है।
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तैयार हो रहे सीड हब
केन्द्र सरकार ने बाजरा की सर्वाधिक उत्पादकता को देखते हुए राजस्थान में जोधपुर व सुमेरपुर में दो सीड हब बनाने का निर्णय किया था, जो निर्माणाधीन है। सीड हब में बाजरा की विभिन्न किस्मों, उनकी गुणवत्ता सुधार, उन्नत बीज उत्पादन व वितरण का काम होगा। पूरे देश में बाजरे का करीब 70-90 लाख हैक्टेयर क्षेत्र है। इनमें सर्वाधिक बाजरा राजस्थान में करीब 50 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में होता है।
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हाईब्रिड बीज में अधिक तापमान सहन करने की शक्ति
विश्वविद्यालय ने बाजरे की हाईब्रिड बीज की एमपीएमएच-17 किस्म विकसित की है। जिसकी यह विशेषताएं होगी
- इस किस्म के दोनो पैतृकों (नर व मादा) में अधिक तापमान सहन करने की शक्ति हैं।
- दोनों पैतृकों की ऊंचाई 2.5 फ ीट की होती हैं, इनसे तैयार संकर बाजरे की ऊंचाई लगभग 7 फ ीट तक की होती है।
- इस किस्म में राजस्थान के देशी बाजरी के सभी गुण विद्यमान हैं।
- पक्षियों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए रोयेंदार सिट्टें होते हैं।
- संकर बाजरे के सिट्टे की लम्बाई पैतृकों के मुकाबले अधिक हैं।
- सिट्टें के पकने तक पौधें हरी अवस्था में रहते है जो गर्मी के इस महत्वपूर्ण दिनों में पशुओं के पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग में लाए जा सकते है।
- इस संकर बाजरे के नर पैतृक के पौधों का फु टाव निरंतर जारी रहता हैं, जिससे संकर बीज उत्पादन के लिए मादा पैतृक को परागणों की लगातार आपूर्ति होती रहती हैं।
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अगले माह बुवाई
विवि की ओर से विकसित बाजरा की हाइब्रिड किस्म एमपीएमएच-17 अच्छा उत्पादन दे रही है। यह पश्चिमी राजस्थान की जलवायु के अनुकूल है। हाइब्रिड बीज की बिंजाई की आवश्यक तैयारी कर ली गई है, अगले माह बुवाई शुरू कर देंगे।
डॉ एमएल मेहरिया, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर
बाजरा परियोजना,
कृषि विवि
Published on:
13 Jan 2020 03:00 am
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