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प्लास्टिक बोटल वेस्ट से बनाए बर्ड फीडर, घूम-घूम कर पूरे जोधपुर में लगा रहा है यह व्यक्ति

शहर के जोधाणा केनाल क्लब सचिव सुमित माहेश्वरी स्नेक व बर्ड लवर भी है। पिछले दो साल से सुमित व उनकी टीम बर्ड हाउस व बर्ड फीडर लगा रही है। लेकिन पिछले बार जो फीडर लगाए उनके प्लास्टिक के कंटेनर में धूप से दरारे आ गई। ऐसे में इस बार इन्होंने स्थाई तरीका देसी जुगाड़ से ढूंढा है।

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motivational story of man making bird feeder from plastic bottles

प्लास्टिक बोटल वेस्ट से बनाए बर्ड फीडर, घूम-घूम कर पूरे जोधपुर में लगा रहा है यह व्यक्ति

अविनाश केवलिया/जोधपुर. पक्षी सेवा का एक अनूठा उदाहरण शहर में युवाओं की एक टोली है। अपनी सूझ-बूझ और देसी जुगाड़ लगाकर अनूठे तरीके का बर्ड फीडर तैयार किया है। जिससे कि पक्षियों को डाले जाने वाले दाना-पानी व्यर्थ नहीं जाता। अब ऐसे फीडर वे पूरे शहर में नि:शुल्क लगाने की तैयारी कर चुके हैं।

शहर के जोधाणा केनाल क्लब सचिव सुमित माहेश्वरी स्नेक व बर्ड लवर भी है। पिछले दो साल से सुमित व उनकी टीम बर्ड हाउस व बर्ड फीडर लगा रही है। लेकिन पिछले बार जो फीडर लगाए उनके प्लास्टिक के कंटेनर में धूप से दरारे आ गई। ऐसे में इस बार इन्होंने स्थाई तरीका देसी जुगाड़ से ढूंढा है। अब जो फीडर बनाए हैं वह कई सालों तक खुले स्थानों पर लगे रहने के बाद भी खराब नहीं होते।

ऐसे बनाया जुगाड़
सुमित ने एक महीने 20 प्रयोग किए और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों से यह दाना-पानी फीडर का जुगाड़ बैठाया। इस फीडर से चिडिय़ा, तोता, कबूतर और गिलहरी दाना-पानी ग्रहण कर सकते हैं। यह बर्ड फीडर अगर पेड़ो की छांव, मकान के पोर्च या छज्जों के नीचे रहे तो 3 से 4 साल कुछ नहीं बिगड़ता।

21 सौ फीड लगाने का लक्ष्य
सुमित बताते हैं कि इस बार क्लब ने शहर में 2100 बर्ड फीडर लगाने का लक्ष्य रखा है। अभी कोविड-19 गाइडलाइन की पालना करते हुए कई राजकीय संस्थाओं व अन्य स्थानों पर लगाया जा रहा है। साथ ही सार-संभाल करने की जिम्मेदारी भी दी जाती है।