
जोधपुर। मानसून की बारिश होते ही रेतीली क्षेत्रों में टिड्डों की हलचल बढ़ गई है। जैसलमेर के रामदेवरा क्षेत्र सिएरा गांव में खेतों में ग्रासहॉपर (मेलेनोप्लस बिविटेटस) मिले हैं। किसान इसे टिड्डी समझकर परेशान हो रहे थे तब जोधपुर से टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) की टीम मौके पर पहुंची और सर्वे में इसे ग्रासहॉपर बताया है। एलडब्ल्यूओ ने इसे संबंध में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज दी।
ग्रासहॉपर नियंत्रण का कार्य एलडब्ल्यूओ का नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार को ग्रासहॉपर नियंत्रण के लिए लिखा गया है। उधर, बीकानेर के सुरजाना गांव में सर्वे के दौरान 25 हेक्टेयर में एकल टिड्डी (सिस्टोसिरा ग्रीगेरिया अथवा रेगिस्तानी टिड्डी) रिपोर्ट की गई है, लेकिन इस टिड्डी की प्रवृति झुंड की नहीं है। ऐसे में गिद्ध, पक्षी और छिपकली जैसे जीव इसको खाकर नष्ट कर देंगे। विशेषज्ञों की राय में आने वाले समय में मानसून की बारिश कम होने से टिड्डी हमले का खतरा नहीं है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं।
ऐसे पहचानें ग्रासहॉपर व टिड्डी को
- ग्रासहॉपर छोटा होता है। इसके शरीर पर सिर से लेकर पैर तक दो धारियां होती है।
- टिड्डी बड़ी होती है। इसके पंखों का फैलाव पैरों से बड़ा होता है। धारियां नहीं होती।
बॉर्डर के दोनों तरफ एकल टिड्डी
खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से 2 अगस्त को जारी रिपोर्ट में भारत-पाक बॉर्डर पर एकल टिड्डी रिपोर्ट की गई है जिससे खतरा नहीं है। यमन, सूडान, इरिट्रिया में मुख्य रूप से वयस्क समूह देखे गए हैं। इसके अलावा अफ्रीकी देश अल्जीरिया, मॉरिटानिया, नाइजर, मिस्र, इथियोपिया, सोमालिया, ओमान में हल्की टिड्डी है, जिसे नियंत्रित कर दिया गया है। फिलहाल पूरे विश्व में टिड्डी नियंत्रण में है।
रामदेवरा क्षेत्र में टिड्डी नहीं ग्रासहॉपर है। इससे फसलों को कोई खास नुकसान नहीं है। बीकानेर में कुछ जगह मामूली टिड्डी रिपोर्ट हुई है लेकिन वह एकल श्रेणी की है। उससे खतरा नहीं है।
वीरेंद्र कुमार, सहायक निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर
Published on:
08 Aug 2023 09:27 am
