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MSME— उड़ रही एमएसएमई ऑर्डिनेन्स की धज्जियां, कैसे पूरे होंगे उद्योग लगाने के सपने?

- ऑनलाइन आवेदन के बाद भी आवेदकों को नहीं मिल रहा लाभ - एनओसी, स्वीकृति व निरीक्षण के बिना उद्योग लगाने का प्रावधान

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जोधपुर

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Amit Dave

Jul 06, 2020

MSME--- उड़ रही एमएसएमई ऑर्डिनेन्स की धज्जियां, कैसे पूरे होंगे उद्योग लगाने के सपने?

MSME--- उड़ रही एमएसएमई ऑर्डिनेन्स की धज्जियां, कैसे पूरे होंगे उद्योग लगाने के सपने?

जोधपुर।

राजस्थान सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योगों (एमएसएमइ) के लिए अध्यादेश (ऑर्डिनेन्स) लाने वाला देश का पहला राज्य है। ऑर्डिनेन्स लाने के पीछे सरकार की मंशा प्रदेश में इन उद्योगों को स्थापित करने में कागजी झंझटों से मुक्ति दिलाना था। तांकि प्रदेश में लघु सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिले । सच्चाई यह है कि ऑर्डिनेन्स के तहत उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए तीन वर्ष तक दी गई छूटों का लाभ नहीं मिल रहा है। इसका कारण जेडीए द्वारा आवेदकों को पट्टे जारी करने में ऑर्डिनेन्स के प्रावधानों को दरकिनार कर रोड़े लगाना है। ऐसे में इस ऑर्डिनेन्स की प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही धज्जियां उड़ रही है, तो उद्यमियों के उद्योग लगाने के सपने कैसे पूरे होंगे?

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अध्यादेश के तहत ये छूट मिली

अध्यादेश की परिभाषा 2 (बी) के अनुसार उद्यमी को उद्योग लगाने के लिए तीन साल तक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), निरीक्षण, स्वीकृति, लाइसेंस या अन्य औपचारिकताओं से छूट दी गई है। उद्यमियों के लिए इन औपचारिकताओं के बिना उद्योग शुरू करने का प्रावधान रखा गया है।

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जेडीए इन कारणों से रोक रहा फाइलें

- बिना निर्माण स्वीकृति के मौके पर निर्माण करना।

- निर्माण में सेट बैक नहीं होना।

- मौके पर पहुंच मार्र्किंग करना कि रोड 60 फुट है, 80 फुट नहीं। 80 फुट होनी चाहिए। जबकि जेडीए द्वारा ही पूर्व में इन्हीं क्षेत्रों में 60 फुट की रोड पर पट्टा विलेख जारी किए गए है।

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सरकार के अध्यादेश के तहत उद्यमियों को एनओसी, परमिशन व निरीक्षण से छूट मिली हुई है। अगर इस प्रकार के मामलों में जेडीए पट्टे नहीं दे रहा है, जेडीए से जानकारी मांगी है। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 14 जुलाई को विवाद व शिकायत निस्तारण बैठक में यह मुद्दा रखेंगे।

एसएल पालीवाल, संयुक्त निदेशक

जिला उद्योग केन्द्र

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नियम-कायदों में अगर कोई आवेदन कर रहा है, तो उनको पट्टे जारी किए जा रहे है।

मेघराजसिंह रतनू, जेडीसी