
जोधपुर शहर की सरकार नगर निगम का क्षेत्र 65 वार्डों तक फैला हुआ है। इनमें से 29 वार्डों में निगम के उप कार्यालय तक नहीं हैं। कई वार्डों के उप कार्यालय केबिन में तो कई के सड़क पर चल रहे हैं। कुछ कार्यालय रैन बसेरे में और कुछ कोटडि़यों में संचालित होते हैं। निगम प्रशासन लाचार है। उसका कहना है कि उसके पास कार्यालय खोलने के लिए वार्डों में जमीन नहीं है।
वार्ड के लोगों को खासी परेशानी
वार्डों में उप कार्यालय नहीं होने से सम्बंधित वार्ड के लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों के पास अपने वार्ड पार्षद व सफाई निरीक्षक के फोन या मोबाइल नंबर तक नहीं है। एेसे उप कार्यालय नहीं होने से लोगों को साफ-सफाई की शिकायत तक के लिए भटकना पड़ता है। कई लोग छोटी-बड़ी शिकायत लेकर निगम के मुख्य कार्यालय तक पहुंच रहे हैं। इससे समय, श्रम और पैसे फिजूल खर्च हो रहे हैं और समस्या का समाधान भी नहीं हो रहा। लेकिन निगम के जन प्रतिनिधि और आला अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे।
वार्ड ४३ : केबिन में उप कार्यालय
वार्ड संख्या ४३ का उप कार्यालय केबिन में संचालित हो रहा है। यहां टूटी कुर्सियां, कबाड़ व अन्य सामान पड़ा है। इस तरह के हालात से शहर की छवि भू धूमिल होती है।
वार्ड ३४ : सड़क पर लगाते हैं कुर्सियां
वार्ड ३४ का उप कार्यालय सड़क पर संचालित होता है। यहां पार्षद व वार्ड निरीक्षक दो-तीन घंटे सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठते हैन। पार्षद सुनील व्यास का कहना है कि उनके पास कोई चारा नहीं है। वार्ड का क्षेत्र एक किलोमीटर तक फैला हुआ है। उन्होंने कई बार निगम बोर्ड बैठक में बात उठाई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
यहां नहीं उप कार्यालय
-सरदारपुरा जोन
सरदारपुरा जोन के वार्ड संख्या ४२,४३,४५, ४६, ४९, ५०, ५१,५२, ५३, ५४, ५५, ५६ , ५७ , ६३, ६४ के उप कार्यालय नहीं बने हुए हैं।
-सूरसागर जोन
सूरसागर जोन के वार्ड संख्या १,२, ३, ५,६, ९,१०,१९,२०, ६५ का कोई उप कार्यालय नहीं है। वहीं यहां १८ व २२ नंबर वार्ड कोई दूसरों के कक्षों में संचालित हो रहे है। इसके अलावा वार्ड संख्या ७ भी किसी कोटड़ी में चल रहा है।
-शहर जोन
शहर जोन में वार्ड संख्या ४८ और ३४ का वार्ड उप कार्यालय नहीं है। जबकि वार्ड संख्या ३२ व ३३ का उप कार्यालय एक साथ सिवांची गेट गैराज के पास चलता है। एेसे में शहर जोन का वार्ड सूरसागर जोन में संचालित हो रहा है।
इनका कहना है
नगर निगम आयुक्त दुर्गेश बिस्सा का कहना है कि शहर में कई जगह ये समस्या है। जैसे-जैसे जगह मिल रही है, उस हिसाब से काम किया जा रहा है।