
जोधपुर के चौपासनी में छह माह तक रहे विराजे थे वर्तमान नाथद्वारा श्रीनाथजी
नन्द किशोर सारस्वत
जोधपुर. वर्तमान नाथद्वारा में स्थापति भगवान श्रीनाथ की मूर्ति 351 साल पहले गोवद्र्धन पर्वत से जोधपुर में लाई गई थी। औरंगजेब ने जब 1669 में हिन्दुओं के मंदिर गिराने की आज्ञा दी तब गोवर्धन पर्वत पर स्थित श्रीनाथजी के मंदिर की मूर्ति को लेकर मंदिर के पुजारी दामोदर अपने चाचा गोविन्द के साथ आगरा , बूंदी , कोटा , किशनगढ़ और पुष्कर होते हुए जोधपुर में आकर चौपासनी गांव के चोखा में पहुंचकर छह माह तक रूके थे। चोखा में छह माह रहने के बाद मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के आग्रह पर श्रीनाथजी की मूर्ति सीहाड़ लेकर गए जहां पर उनका भव्य मंदिर बनवाया गया जो आज श्री नाथद्वारा कहलाता है । यदि उस समय जोधपुर महाराजा जसवन्तसिंह का जोधपुर से हजारों किमी दूर दूसरे देश में असामयिक निधन नहीं होता तो आज श्रीनाथजी चौपासनी में ही विराजमान होते और नाथद्वारा जोधपुर में होता। इतिहास में ऐसा भी वर्णित है की श्रीनाथ जी जब जोधपुर के चौपासनी चौखा में विराज रहे थे उस समय उन्होंने श्री श्याम मनोहर प्रभु के साथ-साथ अन्नकूट अरोगा था।
आज भी छोटा नाथद्वारा कहलाता है चौपासनी चौखा
श्रीनाथजी ब्रज से पधार कर जोधपुर के चौपासनी चोखा में 6 माह विराजित रहे । इसके बाद ही मेवाड़ के नाथद्वारा पधारे । यही कारण है की चौपासनी चोखा को आज भी छोटा नाथद्वारा कहा जाता है। श्रीनाथजी के नाथद्वारा पधारने के बाद भी श्रीनाथजी की चरण चौकी बैठकजी पर पुष्टिमार्गीय परंपरा व रीति रिवाज अनुसार नित्य सेवा होती है । श्रीमद् वल्लभाचार्य आचार्य चरण श्री महाप्रभु के निधी स्वरूप एवं अष्टसखा कीर्तनकार सूरदासजी के सेव्य स्वरूप श्याम मनोहर प्रभु जोधपुर चौपासनी में श्रीनाथजी के पधारने के पूर्व ही विराजमान थे। श्री श्याम मनोहर प्रभु की पूरे वर्ष पर्यन्त पुष्टिमार्गीय परम्परा अनुसार सेवा क्रम चलता है ।
इस बार दर्शनार्थियों को प्रवेश नहीं
चौपासनी मंदिर को श्यामबाबा का मंदिर भी कहा जाता है। चतुर्भुज आकृति के बने मंदिर में जन्माष्टमी त्यौहार पर श्रीकृष्ण को पंचामृत से अभिषेक और दूसरे दिन नंद महोत्सव मनाया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण दर्शनार्थियों का प्रवेश पूरी तरह बंद है।
Published on:
12 Aug 2020 11:40 pm
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