
बेरीगंगा वन क्षेत्र
जोधपुर. वनभूमि पर सीमा स्तंभ और सुरक्षा दीवारों के अभाव के कारण जोधपुर के वनक्षेत्रों में असमंजस की स्थिति के चलते धड़ल्ले से वनभूमि पर अतिक्रमण रूपी लूट हो रही है। शहर के अलग अलग क्षेत्रों की वनभूमि पर सुरक्षा दीवारों के अभाव और सीमा स्तंभ नहीं होने से अतिक्रमण की लगातार शिकायतों के बावजूद वनविभाग के शीर्ष अधिकारियों की नींद नहीं उड़ रही है। वनसीमाओं का सीमांकन नहीं होने से वन भूमि पर कब्जा करने वाले वन अपराधियों के हौसलें दिनों दिन बुलंद होते जा रहे है ।
30 हजार सीमा स्तंभ की जरूरत
जोधपुर वनमंडल में 23650 हेक्टेयर वन भूमि को संरक्षित करने के लिए करीब तीस हजार से अधिक सीमा स्तंभ की जरूरत है लेकिन पिछले दस सालों के दौरान कार्य अधूरा पड़ा है। इस कारण वन भूमियों पर बस्तियों की संख्या बढ़ने से शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाली वनभूमि का खात्मा होता जा रहा है।
2008 में बनी दीवारों का खात्मा
वर्ष 2008 और वर्ष 2015 में जोधपुर के वनक्षेत्रों की सुरक्षा के लिए लीपापोती कर बनाई गई सुरक्षा दीवारों को तोड़कर धड़ल्ले से निर्माण हो रहे है। देवकुण्ड वन क्षेत्र के रावटी में तो वन सुरक्षा दीवारों पर ही मकान और दुकानें बनती जा रही है।
सर्वेयर ही नहीं विभाग के पास
वनविभाग जोधपुर में सर्वेयर के पद लंबे अर्से से रिक्त होने और तहसीलदारों के असहयोग के चलते वनभूमि का विभाग के नाम दर्ज करने और सीमांकन कार्य पिछले दो दशक से ठप है। जबकि वन भूमि का विभाग के नाम दर्ज होना की सुरक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है ।
10 किमी सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव
हमने वन विभाग के एन्युल प्लान ऑफ ऑपरेशन के तहत जोधपुर जिले में वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए 10 किमी लंबी सुरक्षा दीवार, सीमा स्तंभ, नियमित गश्त के लिए 10 बाइक, 4 जीपों , वन चौकी, नाके आदि का भी प्रस्ताव भेजा है। वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-मदनसिंह बोड़ा, सहायक वन संरक्षक जोधपुर
Published on:
13 Sept 2022 10:20 am
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