
नौसर क्षेत्र में मूंगफली की रखवाली करता किसान।
नौसर (फलोदी) . मारवाड़ की ‘बादाम’ कही जाने वाली खरीफ की मुख्य फसल मूंगफली के बाजार भाव जनवरी से लगातार नीचे गिरने से अधिकांश किसानों की फसल नहीं बिक पा रही हैं। तहसील क्षेत्र लोहावट, बापिणी, आऊ, ओसियां, फलोदी आदि के कृषि बहुल गांवों में किसानों को बाजार में मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। जनवरी फरवरी के माह में अमूमन मूंगफली के औसत से ऊपर भाव मिलने की उम्मीद में इस बार किसान धोखा खा गए। बाजार में कपास की फसल के बाद अब मूंगफली के भावों में मंदी ने धरतीपुत्रों के अरमानों पर पानी फेर दिया हैं।
कृषि फार्म पर लगे है ढेर
रबी की फसल पकने के कगार पर है लेकिन इस बार मूंगफली की फसल को किसान बाजार में बेच नही सके। दीपावली के बाद विधानसभा चुनाव के चलते एक बार तो किसानों ने प्राथमिकता के तौर पर माल बेचकर काम चलाया। उसके बाद वर्ष के आखरी महीने में बिकवाली सीजन में एक बार बाजार भाव में रौनक़ से ऊंचे दामों पर फसल बिकने लगी। जनवरी माह में दिनों दिन भाव गिरते गए। गिरते भावों के कारण व्यापारियों ने भी खरीदारी में रुचि नही दिखाई। परिणामस्वरूप कृषि फार्म पर जिंस रोकनी पड़ी।
समर्थन मूल्य से नीचे आए भाव
सरकार द्वारा 2023-24 के लिए मूंगफली का समर्थन मूल्य 6375 रुपए प्रति क्विंटल तय कर रखे है। अभी मूंगफली खल के बाजार में 60-62 एवं चुग्गा के 53-55 सौ के भाव मिल रहे है। जिससे किसानों को लाखों की बचत का नुकसान होता देख उन्हें चिंता सता रही है।
आर्थिक परेशानी
रबी की फसल (अक्टूबर-दिसंबर) बोते समय पहले पकी मूंगफली को बेच भरपाई की। अब बाजार में व्यापारी गिरते भाव से माल खरीदने में कोई रुचि नही ले रहे है। इससे किसानों को भयंकर आर्थिक तंगी सता रही है। सरकार किसानों की आर्थिक हालातो व बाजार भाव की समीक्षा कर किसान हित में कोई निर्णय करे तो बची बचाई उम्मीद से राहत मिल सकेगी।
सरकारी खरीद व्यवस्था सुधरे तो मिले राहत
सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर खरीद की अधिसूचना जारी हो गई थी। मूंगफली का अधिकांश क्षेत्र फलौदी क्रय विक्रय समिति के अंतर्गत आता है। उक्त समिति ने पूर्व में फसल खरीद के कमीशन का भुगतान सरकार की ओर से नही और खुद के स्तर पर वित्त प्रबंधन नही होने के कारण खरीद से असमर्थता जता दी थी। ऐसे में खरीद केंद्र शुरू नही हुए थे। अभी खरीद की तय अवधि 15 फरवरी तक ही है। ऐसे में समितियां खरीद को लेकर गंभीर नहीं है। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
- तुलछाराम सिंवर, प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ।
Updated on:
3 Feb 2024, 3:42 PM IST
Published on:
3 Feb 2024, 3:42 PM IST
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