
rasad vibhag jodhpur, logistics department, ias nirmala meena, jodhpur collector, jodhpur collectorate, jodhpur news, jodhpur news in hindi
जोधपुर. पिछले करीब एक साल से रसद विभाग पटरी से उतरा हुआ है। तत्कालीन जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) निर्मला मीणा के निलंबन के दस महीने बाद भी राज्य सरकार ने कोई अधिकारी नहीं लगाया है। चार महीने पहले स्थानांतरित होकर आए प्रवर्तन अधिकारी को भी अब तक कार्यभार नहीं सौंपा गया है। ताज्जुब की बात यह है कि रसद विभाग का मुखिया खुद कलक्टर होता है। इसके बावजूद शहर के विभाग की हालत खस्ता है। अधिकारी नहीं होने के कारण यहां कामकाज को लेकर कर्मचारी असमंजस में हैं।
राज्य सरकार ने अक्टूबर 2017 में जिला रसद अधिकारी-प्रथम निर्मला मीणा को निलंबित कर दिया था। उनका कार्यभार जिला रसद अधिकारी-द्वितीय ओंकार कविया को सौंपा गया। दस महीने से शहर का डीएसओ नहीं है। कविया जिला परिषद कार्यालय परिसर में बने अपने दफ्तर में बैठते हैं। ऐसे में शहर डीएसओ दफ्तर आने वाले लोगों को दोनों कार्यालयों के बीच चक्कर लगाने पड़ते हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले कई उपभोक्ता गेहूं के लिए इधर-उधर भटकते हैं। हर छोटे मोटे काम के लिए शहर डीएसओ के कार्मिकों को भी दफ्तरों के बीच दौड़ लगानी पड़ती है।
4 महीने से काम नहीं
करीब चार महीने पहले शहर डीएसओ कार्यालय में प्रर्वतन अधिकारी ओमप्रकाश पूनिया का स्थानांतरण किया गया था। डीएसओ कविया ने अब तक पूनिया को कार्यभार नहीं सौंपा। जानकारी के अनुसार पूनिया शहर डीएसओ में काम करना चाहते हैं और कविया ग्रामीण डीएसओ में लगाना चाहते हैं। इसे लेकर खींचतान चल रही है। विभाग के प्रवर्तन निरीक्षकों पर पहले से ही काम का भारी बोझ है। ऐसे में एक अधिकारी के होते हुए भी उनसे काम नहीं लिया जा रहा है।
वे ग्रामीण कार्यालय नहीं आना चाहते
मैंने पूनिया को ग्रामीण डीएसओ में कार्य करने का निवेदन किया था, लेकिन वे आना नहीं चाहते। शहर डीएसओ दफ्तर में तो पहले से ही एक प्रवर्तन अधिकारी है। ग्रामीण डीएसओ कार्यालय में काम भी ज्यादा है।
ओंकार कविया, जिला रसद अधिकारी, द्वितीय
Published on:
31 Jul 2018 01:48 pm
