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jodhpur : राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती में अब युवाओं के लिए एक चौथाई स्थान आरक्षित

राजस्थान साहित्य अकादमी की शोध पत्रिका मधुमती में अब 25 प्रतिशत स्थान युवाओं के लिए आरक्षित किया गया है। अब 25 प्रतिशत आर्टिकल युवाओं के प्रकाशित होंगे।

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jodhpur : राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती में अब युवाओं के लिए एक चौथाई स्थान आरक्षित

jodhpur : राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती में अब युवाओं के लिए एक चौथाई स्थान आरक्षित

जोधपुर. राजस्थान साहित्य अकादमी की शोध पत्रिका मधुमती में अब 25 प्रतिशत स्थान युवाओं के लिए आरक्षित किया गया है। अब 25 प्रतिशत आर्टिकल युवाओं के प्रकाशित होंगे। इससे रिसर्च स्कॉलर को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषकर पीएच.डी. कर रहे युवाओं को इसका सीधा फायदा होगा। पीएच.डी. के दौरान दो शोध आलेख यूजीसी केअर लिस्टेड मैगजीन में प्रकाशित होने की अनिवार्यता के चलते ऐसी मैगजीन में स्थान पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण से पत्रिका की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल : युवाओं को साहित्य से जोड़ने के लिए क्या कर रहे हैं?

सहारण : युवा आज जुड़ेगा तभी तो भविष्य सशक्त होगा। युवा अकादमी के सदैव प्राथमिकता में रहे हैं। अब भी हैं। अकादमी मुख पत्रिका मधुमती में 25 प्रतिशत युवा भागीदारी फैसला लिया गया है। अकादमी युवा रचनाकार समारोह करवाने जा रही है। युवा शिविर लगाने का प्रयास करेगी। राजस्थान की युवा रचनात्मकता पर किताब लाने का अनुमोदन गत बैठक में किया गया है। युवा रचनाकार तसनीम खान इसका संपादन करेंगी। वहीं गांव-कस्बों तक अकादमी पहुंचे, युवाओं तक पहुंचे। यही प्रयास हैं।

सवाल : कोरोना काल के बाद क्या मनोदशा में कोई बदलाव आया है?

सहारण: निःसंदेह। युवा समय से पहले जीवन सत्य को पहचानने लगे हैं। उनके प्रेम का स्वरूप बदला है, प्रगाढ हुआ है। जिंदगी में संग-साथ का बड़ा महत्व है और सहयोग की ताकत बड़ी है, यह भाव बोध रचनात्मक स्तर पर भी आ रहा है।

सवाल: कोरोना काल का साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा?सहारण : जैसा कि बताया उनकी रचना का स्वर भी बदला है। आक्रोश, विद्रोह और क्रांति से आगे शांति, समन्वय और सहयोग बोध का मिश्रण हुआ है।