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होली पर बासनी में रहेगा ‘मिनी इंडिया’ का नजारा

-भारत के विभिन्न प्रांतों के लोग अपने अंदाज से मनाएंगे होली

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बासनी(जोधपुर).

भारत में हर धर्म, सम्प्रदाय को बराबर का सम्मान दिया गया है। हिंदुस्तान में लाखों लोग एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर अपने व्यवसाय, नौकरी की शुरुआत करतें हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो वर्षों से अपने गृहराज्य को छोड़ अन्य राज्यों में काम के सिलसिले में गए और वहीं के होकर ही रह गए। भले ही यह लोग अपने राज्य को छोड़ अन्य राज्यों में आकर स्वयं को स्थापित कर चुके हों, लेकिन आज भी यह अपने राज्य की संस्कृति को नहीं भूले हैं। इन लोगों में जितना सम्मान यहां की संस्कृति का है उतना ही सम्मान अपनी संस्कृति का है। राष्ट्रीय पर्व होली का त्योहार पूरे भारतवर्ष में उत्साह से मनाया जाता है। इसी कड़ी में नाम आता है जोधपुर के बासनी क्षेत्र का। रोजगार की चाह में यहां भी कई सालों पूर्व से भारत के विभिन्न राज्यों, यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि से लोग आकर रहने लगे। इसी वजह से यह क्षेत्री मिनी इंडिया बना हुआ है। भले ही पाश्चात्य संस्कृति की आंधी में लोग अपनी संस्कृति को भूल रहे हैं, लेकिन ये लोग आज भी अपनी संस्कृति से ही त्योहार मनाने में विश्वास रखते हैं। इससे पता चलता है कि इन लोगों को अपनी संस्कृति से कितना प्रेम है। होली का त्योहार इस बार भी दोगुना जोश व उत्साह से मनाने के लिए बासनी का मिनी इंडिया तैयार है, आज के अंक में जानिए मिनी इंडिया के लोग किस प्रकार से होली का त्योहार अपने परिवार, गांव से दूर रहकर यहां मनाएंगे।


कही गुजिया तो कहीं मालपुआ की महक
होली को लेकर मिनी इंडिया के लोगों में अपार उत्साह है। सभी इस दिन को यादगार बनाने के लिए तरह-तरह की तैयारियां कर रहे हैं। कहीं गृहणियां घरों की साफ-सफाई कर रही हंै तो दूसरी तरफ घरों में पकवानों की महक आ रही है। इन पकवानों का स्वाद ऐसा कि एक बार खाए तो खाता ही रह जाए। बिहार का मालपुआ जहां प्रेम के रिश्तों में मधुर मिठास घोलने के लिए तैयार है वहीं उत्तर प्रदेश का गुजिया भी अपनों की खुशियों में शरीक होने को तैयार है।

देवर भाभी की होली है प्रसिद्ध
धुलंडी वाले दिन क्षेत्र के सभी आपस में एक दूसरे को रंग, गुलाल लगातें हैं। इस दिन एक दूसरे के प्रति कितने भी गिले शिकवे हों, सभी एक साथ मिलकर होली मनातें हैं। यहां का प्रमुख रिवाज है देवर भाभी के बीच की होली। इस दिन देवर अपनी भाभी को रंगों से होली खेलातें हैं। भाभी को परेशान करने का भी रिवाज है।

उत्तर प्रदेश समाज
बासनी में रहने वाले उत्तर प्रदेश के लोग इस दिन कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करतें हैं। इस दिन रात के समय होलिका दहन करतें हैं तो सुबह सभी लोग मिलकर होली मनातें हैं। नई कॉलोनी में रहने वाले ओपी पाठक ने बताया कि यहां के लोग होलिका दहन से पूर्व अपने शरीर पर सरसों व हल्दी से बना लेप लगाकर मालिश करतें हैं। इसके बारे में मान्यता है कि शरीर पर लगाए लेप को उतारकर होलिका दहन कर देने मात्र से ही शरीर के सारे दुख, दरिद्रता दूर हो जाती है। होलिका दहन करने के समय सभी ढोल-नगाड़े बजाते हुए होलिका के चारों तरफ परिक्रमा लगाते हैं। इस दिन प्रमुख रुप से गुजिया घरों में बनेगी।

बिहारी समाज
बासनी क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में बिहारी समाज के लोग रहते हैं। यहां रहने वाले समाज के लोग होलिका दहन के बाद से ही होली खेलना शुरु कर देते हैं। यह क्रम अगले दिन दोपहर तक चलता है। सभी लोग एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में जाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं। वहीं इस दिन घरों में एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। जिसमें प्रमुख रुप से मालपुए बनाए जाते हैं। इस बार भी बिहारी समाज के लोगों में होली को लेकर जबरदस्त उत्साह है। बासनी में संजय कॉलोनी, श्रमिक कॉलोनी, सांगरिया, झालामंड, कुड़ी में बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं।

बंगाली समाज
बासनी क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के हजारों लोग रहते हैं। इस दिन बंगाली समाज के लोग यहां राधा-कृष्ण की मूर्ति को रंग बिरंगे फूल, पत्तों से सजाते हुए अबीर, गुलाल लगाते हैं। इसके बाद राधा कृष्ण ? की प्रतिमा के समक्ष सभी लोग मिलकर होली खेलतें हैं। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी प्रेमिका राधा को इसी दिन प्रेम का इजहार किया था। इसलिए प्रेम के प्रतीक राधा-कृष्ण को समर्पित कर यह त्योहार मनाया जाता है।

जमकर होगी खरीदारी
होली के त्योहार को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग अपने व अपने परिवार के लिए नए वस्त्र खरीदते हैं। इससे बाजारों में भी विक्रेताओं को उम्मीद है कि इस होली पर उनके लिए पिछले वर्ष के मुकाबले और अधिक व्यापार होगा।

यहां भी कम नहीं है होली का उत्साह
बासनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में राजपूत, ब्राह्मण, प्रजापत, जाट, विश्नोई सहित कई समाज के लोग रहते हैं। इस दिन सभी समाज के लोग अपने समाज की परंपराओं का निर्वहन करते हुए होली का त्योहार प्रेम, शांति व सद्भाव से मनाते हैं।