
सरसों की जड़ों में ओरोबंकी खरपतवार।
नौसर (जोधपुर). क्षेत्र के किसानों ने इस बार सरसों की फसल को ज्यादा रकबे में बोया है लेकिन सरसों की फसल को जड़ से चूसने वाली लाइलाज खरपतवार ओरोबंकी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
इस परजीवी पौधे के उगने के बाद कुछ दिनों बाद ही फसल कमजोर होकर सूखने लगती है। पोषक तत्व नहीं मिलने से फसल का दाना भी पतला हो जाता है। जिसके कारण तेल व वजन की मात्रा घटकर आधे से कम रह जाती है।
इधर कृषि विशेषज्ञों की मानें तो ये ओरोबंकी (आग्या या भुंईफोड़) खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी, प्रकाश आदि के लिए प्रतिस्पद्र्धा करते है। परजीवी खरपतवार अपना जीवन चक्र की उत्तरजीविका के लिए आंशिक या पूर्णरूप से दूसरे स्वपोषित पौधों पर निर्भर रहते है। यह सरसों कुल की फसल में संश्लेषित पदार्थो को चूसकर उत्पादन को अपेक्षित रूप से नष्ट कर देता है।
ओरोबंकी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण द्विबीजीय फसलों की जड़ों पर आक्रमण करते है। जिससे पौधे छोटे रह जाते हंै। आग्या के चूसकांग सरसों की जड़ों पर घुसकर पोषक तत्व प्राप्त करते है। सावधानी से उखाडऩे पर पता चलता है कि इसकी जड़ें सरसों की जड़ों के अंदर छुपी हुई दिखती है। इसके प्रकोप से सरसों की उपज को 10 से 70 प्रतिशत की हानि होती है।
किसानों के अनुसार सालों बाद भी कृषि विभाग फसलों में इस बीमारी का इलाज नही ढूंढ पाया है। ऐसे में आज उनकी फसलें इस परजीवी की चपेट में आने से चौपट हो रही है।
इनका कहना है
निरोधात्मक उपाय के रूप में यांत्रिक या भौतिक विधियां अपनाकर बुवाई के समय जैविक नियंत्रण किया जा सकता है लेकिन बाजार में इसकी अब तक कोई दवा नहीं आई है
- रतनलाल जीतरवाल, सहायक कृषि अधिकारी , लोहावट
Published on:
24 Jan 2022 10:34 am
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