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नवरात्र विशेष : सच्चियाय माता मंदिर में हैं अंजता-एेलोरा सी मूर्तियां

जानकारों का कहना है कि यहां बनाई गई मूर्तियां अजंता-एेलोरा की मूर्तियों से काफी मिलती-जुलती हैं। अधिकांश मूर्तियां मोहम्मद गजनवी के आक्रमणों व उसके कार्यकाल में तोड़ दी गई थीं।

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Harshwardhan Singh Bhati

Apr 12, 2016

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जिले के ओसियां कस्बे में मां सच्चियाय का आलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं के मन को सदैव ही लुभाता आया है। मां सच्चियाय के मंदिर में शीश नवाने नवरात्र व अन्य उत्सवों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

मंदिर के चारों तरफ नौ देवियों के मंदिर बने हुए हैं। नवरात्रा महोत्सव पर नौ दिन एक-एक देवी की विशेष पूजा-अर्चना व अभिषेक किया जाता है। मंदिर का भव्य रूप एक बहुत बड़े किले की भांति देखने को ही बनता है। मंदिर में चढऩे के लिए 151 सीढि़यां बनी हुई है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि अपने दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

3000 साल पुराना है मंदिर

जानकारों ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण करीब 3000 साल पुराना है। इसका निर्माण करीब आठवीं शताब्दी का बताया जाता है। कथाओं में बताया जाता है कि तत्कालीन राजा उप्पलदेव के स्वप्न में माता ने उन्हें एेसा मंदिर बनाने की प्रेरणा दी थी।

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मंदिर निर्माण के दौरान इस स्थल की खुदाई में नौ लाख स्वर्ण मुद्राएं मिली थीं। इन्हीं मुद्राओं से इस मंदिर को भव्य रूप से निर्मित किया गया था।

हर मूर्ति है खंडित

मंदिर के चारों तरफ बनाई गई एेतिहासिक मूर्तियां पत्थर की गढ़ाई से बनाई गई है। जानकारों का कहना है कि यहां बनाई गई मूर्तियां अजंता-एेलोरा की मूर्तियों से काफी मिलती-जुलती हैं।

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अधिकांश मूर्तियां मोहम्मद गजनवी के आक्रमणों व उसके कार्यकाल में तोड़ दी गई थीं। यहां हर मूर्ति कहीं न कहीं से खंडित जरूर है।

मां की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई

माता के श्रद्धालुओं व जानकारों की मान्यता है कि माता की मूर्ति का निर्माण किसी ने भी नहीं किया था। उनकी यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। यहां लोग जात देने आते हैं।

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बच्चों के झड़ूले करने भी भक्त माता के द्वार आते हैं। जैन सम्प्रदाय की कुलदेवी मां सच्चियाय के दर्शनार्थ सैंकड़ों भक्त माता यहां जुटते हैं। यही नहीं माता के दर्शन के लिए कलकत्ता, मुम्बई, दिल्ली, चैन्नई आदि शहरों से आते हैं।