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जोधपुर

कपड़े पर संस्कृत में लिपिबद्ध है 18वीं सदी की ओसवाल जैन वंशावली, अंबिका माता से होती है इसकी शुरुआत

कपड़े पर संस्कृत में लिपिबद्ध है विसं. 1115 से 18वीं शताब्दी तक की विषद् जानकारी

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जोधपुर. जोधपुर के राजस्थानी शोध संस्थान में जैन साहित्य का विपुल भण्डार संग्रहित है। इस संग्रह में दुर्लभ जैन वंशावली भी है। कपड़े पर संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध वंशावली 62 फीट लम्बी और एक फुट चौड़ी है। वंशावली में विसं. 1115 से लेकर 18वीं शताब्दी तक के जैन समाज पर विषद् जानकारी दी गई है। वंशावली की शुरुआत अम्बिका माता से की गई है। इसमें जोधपुर, भीनमाल, पीपाड़, किशनगढ़, सांगानेर, बीकानेर, उदयपुर, नाथद्वारा, आमेट, माण्डलगढ़, हरसौर के अलावा नागपुर, अहमदाबाद, आगरा शहरों में बसने वाले ओसवाल जैन समाज के परिवारों की वंशावली भी शामिल है। वंशावली के माध्यम से यह पता चलता है कि इतिहास में इस समाज का क्या स्थान था। समाज की सतियों की जानकारी के अलावा शहर के उन मोहल्लों का भी उल्लेख है जहां वे बसे थे। वंशावली के अन्तिम भाग पर जगधर के नाम उल्लेख के साथ यह बताया गया है कि वंशावली का लेखन पाली जिले के नाणा (बाली) गांव में हुआ।

 

दुर्लभ है वंशावली

 

कागजों में तो कई वंशावली मिल जाती है लेकिन कपड़े पर समस्त ओसवाल जैन समाज का चित्रण और वंशावली मिलना दुर्लभ है। इस पर अब तक किसी ने भी शोध नहीं किया।


विक्रमसिंह भाटी, सहायक निदेशक, राजस्थानी शोध संस्थान चौपासनी जोधपुर