
पानी को तरस रहा है राजस्थान का 'सरताज'
जोधपुर. राजस्थान के राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गोडावण संरक्षण व प्रजनन केन्द्र में लंबे अर्से से जलापूर्ति ठप होने के कारण राजस्थान का 'सरताज' कहे जाने वाला राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण पानी को तरसने पर मजबूर है। विभिन्न सरकारी विभागों में आपसी तालमेल समन्वय की कमी और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों की बेपरवाही के कारण पूरे विश्व में विलुप्त प्राय: प्रजाति के वन्यप्राणी के संरक्षण प्रोजेक्ट को पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
क्या है मामलाभारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून व वन विभाग राजस्थान सरकार के सयुंक्त रूप से रामदेवरा में संचालित गोडावण संरक्षण व प्रजनन केंद्र का निर्माण कार्य मार्च 2019 से आरंभ हुआ था। 16-जून 2020 को विधिवत रूप से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पोकरण में पानी सप्लाई के लिए आवेदन किया गया। सहायक अभियंता उप खंड पोकरण के तकमीने के अनुसार लगभग 3किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने के लिए रुपए 15 लाख 99 हजार प्रोजेक्ट फण्ड से दो किश्तों में पीएचईडी पोकरण खंड को जमा भी करवाए गए। जिनमे पथरीली व ग्रामीण क्षेत्र की 600 मीटर लोहे की पाइप लाइन व 2400 मीटर प्लास्टिक के लिए प्रस्तावना थी। परंतु ठेका फर्म ने पूरी की पूरी पाइप लाइन ही घटिया किस्म डाल कर जलापूर्ति शुरू की। परंतु तकनीकी खामियां व पाइप लाइन की निम्न स्तर की क्वालिटी की वजह से जगह जगह लीकेज होने से क्षेत्र के गांव की गलियों व मकानों में पानी घुसने पर गांव वालो ने पानी की सप्लाई ही बंद करवा दी । जलापूर्ति बंद होने पर गोडावण प्रोजेक्ट के साइट इंचार्ज ने पीएचईडी पोकरण के अधिकारियों से संपर्क कर निवेदन भी किया। लेकिन अधिकारी कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए ।
मामले में उच्च स्तरीय जांच होराज्य के लिए एक महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण संरक्षण कार्यक्रम के लिए बिछाई गई घटिया पाइप लाइन में 25 से अधिक स्थानों पर मरम्मत के बावजूद कई रिसाव हैं। परियोजना टीम के स्थल निरीक्षण के अनुसार विस्तृत अनुमान में प्रस्तावित होने के कारण कार्य नहीं किया गया था। पाइपलाइन टूटने से यह भविष्य के लिए चिंता का विषय बना रहेगा। मामले में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर असरपर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान, हौबारा संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय कोष के साथ तकनीकी सहयोग से गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, राज्य के लिए एक महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण संरक्षण कार्य कर रहे हैं। जिसमें गोमत, रामदेवरा के पास एक संरक्षण प्रजनन केन्द्र में सुविधा के लिए पानी के कनेक्शन का काम पीएचईडी, पोखरण को सौंपा गया है। लेकिन करीब एक साल बीतने के बावजूद अभी तक नियमित पानी की आपूर्ति नहीं मिली है। नतीजन केन्द्र संचालन में देरी से जैसलमेर के सम में संचालित अस्थाई प्रजनन केन्द्र में इन्क्यूबेट किए 16 गोडावण के चूजों को शिफ्ट करने में देरी से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकता है।
गोडावण विलुप्त होने के यह भी कारणकरीब चार दशक पूर्व जैसलमेर के रेगिस्तान में राजस्थान के 'सरताज' पक्षी गोडावण की संख्या करीब 1260 थी , जो घटकर वर्तमान में मात्र दो अंकों तक जा पहुंची है । पवन चक्कियों की अंधाधुंध स्थापना सहित बस्टर्ड विचरण स्थलों पर फैलता हाइटेंशन बिजली के तारों का जाल दुर्लभ पक्षी के लिए अकाल मौत का कारण बनता जा रहा है ।
पूरे गांव को परेशानी
ठेकेदार की ओर से प्लास्टिक की लीकेज पाइपलाइन के कारण पूरे गांव में जगह जगह पानी भरने लगा है। नई सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी शिकायत पांच माह पूर्व एईएन से भी की थी । लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।जुबैदा फिरोज खां, सरपंच, गोमट ग्राम पंचायत
रिपोर्ट-नंदकिशोर सारस्वत
Published on:
10 Mar 2022 04:47 pm
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