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जोधपुर .
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी अ श्रेणी जिला आयुर्वेद चिकित्सालयों के पंचकर्म केन्द्रों के साथ मजाक कर दिया है। सरकार की ओर से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर में एक साल का डिप्लोमा कोर्स तो पंचकर्म तकनीकी सहायक का करवाया जा रहा है, लेकिन सरकार ने शैक्षिक योग्यता की शर्त को भुलाकर आरटीपीपी रूल्स के तहत संविदा पर एक-एक अभ्यंगकर्मी (मसाजर) लगाने के लिए बजट स्वीकृति दी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उभर रहा है कि यदि शैक्षिक योग्यता का कोई पैमाना ही नहीं है तो विवि में यह कोर्स क्यों करवाया जा रहा है?
जोधपुर के करवड़ स्थित राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पंचकर्म तकनीकी सहायक सर्टिफिकेट कोर्स का इस साल तीसरा बैच चल रहा है। पहले दो बैच में कई युवा पंचकर्म कोर्स को सीखकर सरकार की नौकरी या संविदा पर सेवाएं देने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने पंचकर्म केन्द्रों पर केवल अभ्यंगकर्मी (मसाजर) के नाम से ही बजट जारी कर बजट घोषणा की पालना में खानापूर्ति कर दी है।
आदेश पर इसलिए है सवाल
पंचकर्म केन्द्रों पर संविदा पर जो अभ्यंगकर्मी (मसाजर) लगाए जाएंगे, उसकी शैक्षिक योग्यता क्या होगी, इसका आदेश में कोई खुलासा नहीं है।
-संविदा पर एक-एक अभ्यंगकर्मी के रूप में पुरुष को काम पर रखते हैं तो महिला रोगियों को अभ्यंग (मसाज) की सुविधा कैसे मिलेगी? इसके विपरीत यदि संविदा पर महिला अभ्यंगकर्मी को काम मिलेगा तो पुरुष रोगियों को अभ्यंग(मसाज) की सुविधा कैसे मिलेगी?
-राजकीय जिला आयुर्वेद 'अÓ श्रेणी चिकित्सालयों के पंचकर्म केन्द्रों पर रोगियों के इलाज के लिए पंचकर्म के सभी कर्म किए जाते हैं, केवल अभ्यंग (मसाज) नहीं। बिना प्रशिक्षित अभ्यंगकर्मी के जरिए पंचकर्म के अन्य कर्म जैसे- वमन्य विरेचन, नस्य, रक्तमोक्षण, बस्ति कर्म जैसे अन्य कर्मों से रोगियों का उपचार कैसे होगा?
क्या कहते हैं डिप्लोमाधारी
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर में एकवर्षीय डिप्लोमा कोर्स कर चुके पंचकर्म तकनीकी सहायकों का कहना है कि सरकार ने बिना योग्यता की शर्त के ही केवल अभ्यंगकर्मी को संविदा पर रखने का आदेश कर विवि में शैक्षिक योग्यता हासिल कर पंचकर्म तकनीकी सहायकों के साथ मजाक किया है। इस मामले में सरकार को संशोधित आदेश जारी करना चाहिए।
यह हो रहा अन्य राज्यों में
राजस्थान में संविदा पर अभ्यंगकर्मी की शैक्षिक अर्हता की शर्त शामिल नहीं की है। वहीं उत्तराखण्ड सरकार, अंडमान-निकोबार के स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से पंचकर्म केन्द्रों पर संविदा पर शैक्षिक योग्यताधारी पंचकर्म तकनीकी सहायक लेने के लिए बजट स्वीकृति दी गई है।
इनका कहना है
अभ्यंगकर्मी कुछ समय के लिए संविदा पर लिए जा रहे हैं। वे चिकित्सक के निर्देशन में अभ्यंग थैरेपी देंगे। जब स्थायी भर्ती निकलेगी, तब योग्यता के जरिए ही चयन होगा।
स्नेहलता पंवार, निदेशक, आयुर्वेद निदेशालय राजस्थान, अजमेर
Published on:
29 Sept 2017 04:25 pm

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