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मोर पंख की अंधाधुंध बिक्री के बाद चेता वन विभाग, पहली बार होगी मोरों की गणना

२५ अक्टूबर को राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने संभाग के मुख्य संरक्षक की बैठक बुलाकर मोरों की गणना के निर्देश दिए।

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जोधपुर . प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय पक्षी मोरों की अलग से गणना की जाएगी। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (एसीसीएफ) राजस्थान ने संभाग स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में इस सम्बन्ध में निर्देश दिए। राजस्थान पत्रिका में १८ अक्टूबर को 'कहीं मोर की जान की कीमत पर तो नहीं बिक रहे पंख' एवं मोरों की विधिवत गणना आज तक नहीं होने को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद २५ अक्टूबर को राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने संभाग के मुख्य संरक्षक की बैठक बुलाकर मोरों की गणना के निर्देश दिए।

जोधपुर संभाग में १ दिसम्बर से सात दिवसीय गणना प्रतिदिन सुबह ६ बजे से शाम ५ बजे तक होगी। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य संभागों में भी तारीखें तय कर मोरों की गणना की जाएगी।गणना में संभाग के जिलों में स्थित वन, आबादी क्षेत्रों व राजस्व भूमि सहित मोर बहुल समस्त क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। जिलों के उपवन संरक्षक उपलब्ध संसाधनों को उप भागों में बांटकर अलग-अलग तारीख को गणना करेंगे। निर्देश में दो वन मंडल की सीमाओं पर स्थित क्षेत्रों में गणना अनिवार्य रूप से एक ही दिन में पूरी करने को कहा गया है, ताकि परिणाम में ओवरलेपिंग की संभावना न्यूनतम हो।

इनका भी लेंगे सहयोग

मोरों की गणना में पंचायतीराज संस्थाओं के अलावा स्थानीय निकायों एवं गैर सरकारी संस्थाओं का सहयोग लेने को कहा गया है। गणक दलों का गठन उपवन संरक्षक स्तर पर ही करने तथा गणना दल को आवश्यक प्रशिक्षण एवं गणना सामग्री उपलब्ध कराया जाएगा। गणना पूरी होने के बाद संबंधित जिलों के उपवन संरक्षक प्रत्येक गणना क्षेत्र के परिणामों का संकलन कर सारणी के रूप में ९ दिसम्बर को संभाग के मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव को सौंपेंगे। सारणी में डिविजन, रेंज, ग्राम पंचायत, गणक दल के सदस्यों के नाम, गणना की तारीख, गणना शुरू करने का समय और गणना खत्म करने का समय अंकित करना होगा। मोरों की संख्या में नर, मादा, बच्चे सहित कोई विशेष विवरण हो तो उसे भी अंकित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अलग से मोरों की गणना पहली बार


पूरे प्रदेश में पहली बार अलग से मोरों की गणना दिसम्बर में होगी। जोधपुर संभाग के जिलों में जहां मोर बहुल क्षेत्र है, वहां उप वन संरक्षक को गणना के लिए एनजीओ और पंचायतीराज संस्थाओं का सहयोग लेने को भी कहा गया है।

आरएस शेखावत, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) जोधपुर संभाग

ग्रिडबेस ट्रांजेक्ट पद्धति से हो गणना


मोरों की गणना का निर्णय स्वागत योग्य कदम है। मोरों की गणना संबंधित क्षेत्रों में साइंटीफिक पद्धति से ग्रिडबेस ट्रांजेक्ट पद्धति से हो तो वास्तविक संख्या सामने आ सकती है।

डॉ. हेमसिंह गहलोत, पक्षी विशेषज्ञ जोधपुर


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