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नए साल के आगमन के साथ छाई पेलिकन की बहार, जलाशयों पर कुरजां के समूह

जोधपुर के पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ शरद पुरोहित ने बताया कि तालाबों और वेटलैण्ड्स का संरक्षण जरूरी है और उन्हें प्रदूषित करना बंद नहीं हुआ पक्षियों का सतरंगी संसार जोधपुरवासी कभी नहीं देख पाएंगे।

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जोधपुर. नव वर्ष का आगमन से पूर्व मारवाड़ का मौसम कई सालों बाद इतना ठंडा हुआ हैं। तापमान में गिरावट के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मेहमान परिन्दे जोधपुर जिले के आसपास के सभी जलाशयों पर डेरा डाले हुए है। कुरजां के अलावा बड़ी संख्या में पेलिकन पक्षी भी पहुंचे हैं। रूडी शेल डक, नार्दन पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, फ रिग्युनस, पेलिकन, हेरॉन, टफ टेड डक, कॉमन टील, यूरेशियन विजन, रफ एण्ड रीव जैसे जलीय पक्षियों के अलावा शिकारी पक्षियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं सबसे दयनीय बात यह है कि जोधपुर के प्रमुख जलाशय उम्मेद सागर और बड़ली तालाब पर पक्षी नदारद हैं। सूरसागर तालाब, गंगलाव तालाब भी अंतिम सांसें गिन रहा है। ऐसे में प्रवासी पक्षियों को जिले के दूसरे जलाशयों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जोधपुर के पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ शरद पुरोहित ने बताया कि तालाबों और वेटलैण्ड्स का संरक्षण जरूरी है और उन्हें प्रदूषित करना बंद नहीं हुआ पक्षियों का सतरंगी संसार जोधपुरवासी कभी नहीं देख पाएंगे। इसके लिए शहरवासियों को जागरूक होकर प्रकृति के संरक्षण में सहयोगी होना होगा।