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पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी के चुनावी दिनों में था उत्सव सा माहौल, बच्चे भी समर्थन में लगाते थे नारे

विलक्षण व्यक्तित्व की धनी कृष्णाकुमारी को जीवन में कई झंझावतों से जूझना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर सुख-दुख में समभाव व तटस्थ भूमिका निभाते हुए कर्म करना ही अपना लक्ष्य बनाया।

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जोधपुर. पूर्व सांसद और मारवाड़ राजघराने की पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी के निधन से आमजन शोकाकुल है। मारवाड़ के लोग उन्हें मां की तरह सम्मान देते आए थे। पूर्व राजमाता भी आमजन के दिलों में बसती थीं। यही कारण है कि उनके जाने के बाद भी लोग उनसे जुड़े संस्मरण याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। विषम परिस्थितियों में मारवाड़ के गौरव की रक्षा करने वाली पूर्व राजमाता ने अपने गरिमामय चरित्र से लोगों का अपनापन पाया था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यही है कि उनके पति पूर्व राजघराने के महाराजा हनवंतसिंह के निधन के बाद सत्ता की बागडोर उन्होंने महज 26 साल की उम्र में ही संभाल ली थी। सन् 1971 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ा व 21 हजार 497 मतों से विजयी रही थीं। उन्होंने क्षेत्र के साथ ही पूरे प्रदेश की जनता की आवाज संसद में पुरजोर तरीके से उठाई थीं।

चुनाव के दिनों में राजनीति क्षेत्र में अपनी शुरुआत के दिनों में मारवाड़ की जनता ने भी भरपूर सहयोग दिया था। जोधपुर के छायाकार मनोज बोहरा उन दिनों से जुड़े अपने संस्मरण पत्रिका के साथ साझा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व राजमाता के चुनाव लडऩे के दिन उन्हें अच्छे से याद हैं। तब उनकी उम्र छह साल की थी लेकिन पूर्व राजमाता के प्रति स्नेह अपार था। पूर्व राजमाता का चुनावी चिन्ह ऊंट था। मनोज ने बताया कि उनके चुनावी चिन्ह के बिल्ले लगा कर भीतरी शहर के मोहल्ले के बड़े व बच्चे उनके समर्थन में नारे लगाया करते थे। बोहरों की पोल मोहल्ले के बाहर उस समय करीब 12 गुणा 4 का लंबा बैनर लगाया गया था। जो लकड़े की चौखट पर कपड़ा लगा कर बनाया गया था। उस समय मोहल्ले के उदयकिशन बोहरा उम्मेद भवन में कार्यरत थे। वे वहां से बिल्ले व पेंपफ्लेट लाकर बच्चों को दिया करते और उन्हें गली-मोहल्लों में भेजकर समर्थन जुटाया करते थे। पूर्व राजमाता की भारी जीत पर मोहल्लों में लड्डू बांटे गए थे और नौपत बजा कर खुशियां जाहिर की गई थीं। चुनाव जीतने के बाद भी बच्चों में इतना उत्साह था कि वे बिल्ले लगा कर घूमते रहते थे।

पूर्व राजमाता ने निभाई तटस्थ भूमिका


पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी का जन्म 10 फ रवरी 1926 को ध्रांगध्रा (सौराष्ट्र) गुजरात में हुआ था। उनका विवाह 14 फरवरी 1943 को जोधपुर के महाराजा हनवंतसिंह के साथ हुआ था। एक पुत्र पूर्व सांसद गजसिंह व चंद्रेशकुमारी और शैलजा कुमारी दो पुत्रियां हैं। राजमाता कृष्णाकुमारी मारवाड़ में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रही थीं। सांसद रहते हुए उनका जोधपुर में हवाई व रेल सेवा के विस्तार, भारत पाक युद्ध के समय जवानों के परिवार को भावनात्मक व आर्थिक सहयोग देने में विशेष योगदान रहा। विलक्षण व्यक्तित्व की धनी कृष्णाकुमारी को जीवन में कई झंझावतों से जूझना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर सुख-दुख में समभाव व तटस्थ भूमिका निभाते हुए कर्म करना ही अपना लक्ष्य बनाया।

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