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पहले रिमिक्स-फ्यूजन, अब नई मूवी में ओल्ड सॉन्ग्स का तडक़ा

जोधपुर. दिलकश संगीत ( Savory music ) की सरगम सभी का मन मोहa लेती है। क्यों कि संगीत दिल का सुकून है ( music is relax of heart ) । अच्छा संगीत इन्सान में ताजगी और जोश भर देता है। संगीत की धुन लय और ताल किसी भी भाषा की मोहताज नहीं है। संगीतकारों ( musicians ) और गायकों ( singers ) की मानें तो आज के संगीत में प्रयोगधर्मिता और नयापन आ गया है। बॉलीवुड ने संगीत जगत को कई अमर गीत दिए हैं, जो सदाबहार ( evergreen ) हैं। कई पुराने नगमे ( old songs ) तो एेसे हैं कि जिनकी लोकप्रियता हर दौर में बनी रही। इस पर आज के संगीतकारों ने कभी उन पर रीमिक्स ( remix songs ) बनाए तो कभी फ्यूजन म्यूजिक ( fusion song ) बनाया। आजकल तो इसका विस्तार यह हो गया है कि पुरानी फिल्मों के नगमे नई फिल्मों में नये अंदाज में पेश किए जा रहे हैं। यह बात दीगर है कि ये नगमे ऑरिजनल सॉन्ग ( orignal songs ) की बराबरी नहीं कर पा रहे।    

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जोधपुर

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MI Zahir

Aug 08, 2019

Previously remix-fusion, now a trio of old songs in new movies

Previously remix-fusion, now a trio of old songs in new movies

जोधपुर. ओल्ड इज गोल्ड। आज भी अगर पुराने नगमे ( old songs ) सुनने को मिल जाए तो फिर क्या कहना। इनकी बात ही कुछ अलग है। इसलिए तो इन्हें सदाबहार ( evergreen ) कहते हैं। पुराने नगमों के बोल इतने पॉपुलर हैं कि अब नई मुवी में भी ये सॉन्ग्स ( old songs ) सुनने को मिल रहे हैं। पहले एक-दो मूवी में यह रंगत जमी। पुराने नगमों को नई आवाज में पिरोया गया लेकिन अब तो अधिकतर मूवीज में पुराने हिट सॉन्ग्स ( hit songs ) चल रहे हैं। हालांकि एक दौर वह भी आया जब पुराने गानों ( old songs ) को रिमिक्स में प्रस्तुत किया गया, लेकिन अब तो रिमिक्स ( remix song ) की जगह पूरा ही ओल्ड इज गोल्ड हो गया है। दिल क्या करे जब किसी को...सारा जमाना हसीनों का दीवाना...ना जाने कहा से आई है...कजरा मोहब्बत वाला...सांग नई मूवी में भी सुनने को मिल रहे हैं।

फिर भी बराबरी नहीं
एक्सपेरिमेंट और इनोवेशन संगीतकारों और गायकों की मानें तो आज के संगीत में प्रयोगधर्मिता और नयापन आ गया है। बॉलीवुड ने संगीत जगत को कई अमर गीत दिए हैं, जो सदाबहार हैं। कई पुराने नगमे तो एेसे हैं कि जिनकी लोकप्रियता हर दौर में बनी रही। इस पर आज के संगीतकारों ने कभी उन पर रीमिक्स बनाए तो कभी फ्यूजन म्यूजिक बनाया। आजकल तो इसका विस्तार यह हो गया है कि पुरानी फिल्मों ( old films ) के नगमे ( old songs ) नई फिल्मों में नये अंदाज में पेश किए जा रहे हैं। यह बात दीगर है कि ये नगमे ऑरिजनल सॉन्ग की बराबरी नहीं कर पा रहे।

एक्सपेरिमेंट्स विद सॉन्ग गीत ऑरिजनल फिल्म का नाम रीमिक्स फिल्म का नाम

1. वो सुबह कभी तो आएगी फिर सुबह होगी- बेगम -जान
2. तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त -मोहरा -मश्ीान

3. गुलाबी आँखें -द ट्रेन -नूर
4. दिल क्या करे जब किसी को -जूली -काबिल

5. सारा ज़माना हसीनों का दीवाना -याराना -काबिल
6. ना जाने कहा से आई है -चालबाज -आई मी और मैं

7. हर किसी को नहीं मिलता -जांबाज -बॉस
8. ये चाँद सा रोशन चेहरा -कश्मीर की कली -स्टूडेंट ऑफ द ईयर

9. लैला मैं लैला कैसी में लैला -कु़र्बानी -रईस
10. तम्मा तम्मा लोगे -थानेदार -बद्रीनाथ की दुल्हनिया

11. चलत मुसाफिर मोह लिया रे -तीसरी कसम -बद्रीनाथ की दुल्हनिया
12. हंगामा हो गया -अनहोनी -क्वीन

13. ओए ओए तिरछी टोपी वाले -त्रिदेव -अजहर
14. कजरा मोहब्बत वाला- किस्मत -तनु वेड्ज़ मनु

कलाकारों की नजर में
असल गाने को मात नही दे सकता

कहते हैं कि अगर नींव मजबूत हो तो इमारत मजबूती से खड़ी रहती है, लेकिन पर यदि इमारत की दीवार ही कच्ची हो तो नींव भी उसे संभाल नही सकती। ठीक ऐसा ही आज के समय के रॉक गानों का हाल है। सदाबहार पुराने गानों के पुन: निर्माण का दौर आया तो है परंतु उसमें जैज, बीट, बास या रैप डालने से उस गाने का मूल रूप खोता जा रहा है। जहां एक तरफ ये चांद सा रोशन चेहरा गाने से हमें कश्मीर की वादियों का एहसास होता है, वहीं आज उसी गाने के नये रूप में केवल अभद्रता झलकती है। मन को शांत करने वाले गाने को थ्रॉबिंग स्टाइल में रोमांचकारी बनाने के लिए रैप डालने से वह हमें कुछ देर के लिए आकर्षित करेगा, लेकिन वह असल गाने को मात नही दे सकता। और तो और ये गाने बस आज की पीढ़ी की उस दौर के बारे में अवधारणाएं बनाने में ही मदद करते हंै।
-सतीश बोहरा

टीवी व रेडिया संगीतकार, जोधपुर
यह अच्छा नहीं है

हम सब जानते हैं कि आजकल पुराने अच्छे गानों को बदल कर या वैसा का वैसा ही गाया व बजाया जा रहा है ,जो कि अच्छा नहीं है। यह एक तरह से गाना खुद न बना कर दूसरों की कल्पना के साथ छेडख़ानी करना है, जिससे उन गानों की ख़ूबसूरती खत्म हो जाती है।
-भूमिका सेवानी, गायिका व हारमोनियम वादक, जोधपुर

नई कल्पनाओं को स्थान नहीं मिल रहा
पुराने अच्छे गीतों को बदल कर या वैसा का वैसा गाना अच्छा है। इसका एक पहलू यह है कि चलो इसी बहाने लोग पुराने गाने भी सुन रहे हैं, मगर इससे नई कल्पनाओं को स्थान नहीं मिल पा रहा है।

-अखिल बोहरा, गायक व गिटारवादक,जोधपुर