
धोरो पर ‘राग-मल्हार’, पत्थरों का शहर सूना
अविनाश केवलिया
जोधपुर. पर्यटन सीजन खत्म होने के कगार पर है, लेकिन जैसलमेर के प्रति क्रेज कम नहीं हुआ है। इस बार कोविड के कारण विदेशी पर्यटक ज्यादा नहीं हैं, लेकिन हिंदुस्तानी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा है। यहां जाने वाले अधिकांश पर्यटक हमारे शहर जोधपुर से ही होकर गुजरते हैं, लेकिन तवज्जो ज्यादा जैसलमेर को ही मिलती है। मरू महोत्सव जैसलमेर को भी देश-विदेश में जबरदस्त ख्याति मिली है। लेकिन इसके उलट जोधपुर में फिलहाल ऐसे सरकारी प्रयास का अभाव है। इसी कारण पड़ोसी जिले के धोरों पर ‘राग मल्हार’ गाया जा रहा है और हमारा ‘पत्थरों का शहर’ सूना है।
हर साल 12 लाख, पिछले साल एक लाख भी नहीं
जोधपुर में हर साल 12 लाख पर्यटक आते हैं। इसमें देसी और विदेशी दोनों शामिल हैं। लेकिन इस बार कोविड के कारण यह आंकड़ा एक लाख तक भी नहीं पहुंच पाया। जो पर्यटक जोधपुर आता है उसमें से अधिकांश जैसलमेर जरूर जाता है। खास बात यह है कि जोधपुर में बमुश्किल एक नाटइट स्टे करने वाला पर्यटक जैसलमेर में दो से तीन दिन तक ठहरता है।
जबरदस्त प्रचार
24 तारीख से प्रस्तावित जैसलमेर के मरू महोत्सव का जबरदस्त प्रचार किया गया है। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार, पंकज त्रिपाठी से लेकर कई शख्सियत इस मेले में आने की अपील कर चुकी हैं। इसका फायदा भी जिले के पर्यटन को मिलता है।
फायदा कुछ ऐसा
चार दिन के औपचारिक और उसके आस-पास 10 दिन तक पर्यटक बूम बनता है। होटल व्यापारियों और ड्यून्स पर कैम्प संचालक इस अवधि में विशेष पैकेज अवसर दे रहे हैं। इन 10 दिनों में लाखों की संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है।
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जोधपुर ऐसे ले सकता है फायदा
जोधपुर में भी ‘मारवाड़ महोत्सव’ सहित अन्य उत्सव होते हैं, लेकिन वे पर्यटकों को ज्यादा लुभा नहीं पाते। देश-विदेश के पर्यटकों में हेरिटेज के प्रति यदि उत्साह बढ़ाया जाए तो जैसलमेर की तर्ज पर यहां भी लोगों का रुझान थोड़ा बढ़ेगा। हेरिटेज ड्राइव के जरिये सभी वर्ग को जोड़ कर सरकार, प्रशासन व पर्यटन विभाग प्रयास करें तो पर्यटकों का एक नाइट का स्टे दो से तीन रातों में बदल सकता है। जिसका सीधा असर यहां की पर्यटन इंडस्ट्री को मिलेगा।
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जोधपुर में ये हो सकते हैं प्रयास
1- वॉर म्युजियम- हाल ही में जिला कलक्टर ने बैठक कर जोधपुर में भी वार म्युजियम स्थापित करने की दिशा में पहले करने के संकेत दिए।
2- हॉस्पिटेलिटी - हर क्षेत्र से जुड़े लोगों को हॉस्पिटेलिटी में दक्ष करने का निर्णय किया।
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हेरिटेज संरक्षण को जल आंदोलन बनाएंगे
जोधपुर का हेरिटेज यहां की पहचान है। लेकिन पर्यटक तो छोडिये युवा व शहरवासी ही भूलते जा रहे हैं। हम प्रयास करेंगे कि हेरिटेज स्थल को खुद हम सुधारें। आगामी पांच-छह माह में एक जन आंदोलन खड़ा करेंगे। मरू महोत्सव की तर्ज पर यहां आयोजन होता है तो उसकी थीम भी हेरिटेज रहेगी।
- इंद्रजीतसिंह, जिला कलक्टर, जोधपुर।
Published on:
22 Feb 2021 11:44 pm
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