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राजस्थान के यह 5 सरकारी कॉलेज 500 विद्यार्थियों को करा रहे अवैध बीएड!

एनसीटीई ने आम सूचना जारी कर कहा है कि कोई भी व्यक्ति 200 रुपए देकर डिग्री की वैधता के बारे में जानकारी ले सकता है। इसके अंतर्गत एनसीटीई ने राजस्थान के पांचों कॉलेजों के बीएड पाठ्यक्रम को 2019-20 के लिए अवैध बताया है।

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राजस्थान के यह 5 सरकारी कॉलेज 500 विद्यार्थियों को करा रहे अवैध बीएड!

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर.राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) प्रदेश के 5 सरकारी बीएड कॉलेजों की मान्यता खत्म कर चुकी है, इसके बावजूद शैक्षणिक सत्र 2019-20 इनमें पांच सौ विद्यार्थी बीएड द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयनारायण व्यास विवि, मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि और अजमेर स्थित एमडीएस विवि से दी जाने वली डिग्री अवैध मानी जाएगी।

प्रदेश में 7 सरकारी और 935 निजी बीएड कॉलेज हैं। एनसीटीई ने अक्टूबर 2018 में 7 में से 5 कॉलेज में बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। सत्र 2019-20 से जयपुर के चिमनपुरा व कालाडेरा, जोधपुर के भोपालगढ़, अजमेर के नसीराबाद और उदयपुर के खेरवाड़ा बीएड कॉलेज में प्रवेश पर रोक लगा दी गई। फिर भी ये कॉलेज विवि के जरिए पढ़ाई जारी रखे हैं।

उधर एनसीटीई ने आम सूचना जारी कर कहा है कि कोई भी व्यक्ति 200 रुपए देकर डिग्री की वैधता के बारे में जानकारी ले सकता है। इसके अंतर्गत एनसीटीई ने राजस्थान के पांचों कॉलेजों के बीएड पाठ्यक्रम को 2019-20 के लिए अवैध बताया है। उल्लेखनीय है कि इन कॉलेजों की मान्यता बहाल करने की राज्य सरकार की अपील एनसीटीई दो महीने पहले खारिज कर चुकी है।

पीटीईटी से नहीं मिला प्रवेश
मान्यता रद्द होने से पीटीईटी-2019 के जरिए इन कॉलेजों में प्रवेश नहीं दिया गया। लेकिन बीएड दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इन कॉलेजों में अध्ययनरत अंतिम वर्ष के छात्रों को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित करने की बजाय यहीं पढ़ाया जा रहा है।

जेएनवीयू ने दी रखी है सम्बद्धता
जोधपुर स्थित जेएनवीयू ने सालाना निरीक्षण करके परसराम मदेरणा महाविद्यालय भोपालगढ़ को शैक्षणिक सत्र 2019-20 की मान्यता दे दी और अवैध डिग्री से अनजान विद्यार्थी अभी भी वहां पढ़ाई भी कर रहे हैं।

राजस्थान विवि ने सम्बद्धता हटाई, लेकिन पढ़ाई की अनुमति दी
राजस्थान विवि ने बाबा भगवान दास राजकीय महाविद्यालय चिमनपुरा और आरएल सहारिया महाविद्यालय कालाडेरा को बीएड 2019-20 सत्र में द्वितीय वर्ष की सम्बद्धता रद्द कर दी लेकिन विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें वहां रखने की (रिटेन शब्द का इस्तेमाल) अनुमति प्रदान की है। तकनीकी व वैधानिक दृष्टि से यह संबद्धता नहीं है। प्रश्न यह है कि संबद्धता विहीन महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय उपाधियां दे पाएगा और क्या ये उपाधियां वैध मानी जाएंगी?

इस कारण रद्द हुई मान्यता

1 बाबा भगवानदास महाविद्यालय चिमनपुरा- 1 शिक्षक, एचओडी नहीं
2 आरएल सहरिया महाविद्यालय कालाडेरा- 6 शिक्षक, एचओडी नहीं, केवल 300 वर्ग मीटर में भवन
3 परसराम मदेरणा महाविद्यालय भोपालगढ़- 6 शिक्षक, एचओडी नहीं, 362 वर्ग मीटर में है भवन
4 राजकीय महाविद्यालय खेरवाड़ा- 5 शिक्षक, एचओडी नहीं, 342 वर्ग मीटर में बना है भवन
5 एसजीएसजी महाविद्यालय नसीराबाद- 1 शिक्षक, एचओडी नहीं, 1731 वर्ग मीटर में बना है भवन

सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो पछताएंगे बच्चे
राज्य सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि 500 बच्चों को अन्य महाविद्यालयों में स्थानांतरित कर उनकी पढ़ाई जारी रखी जा सके। ऐसा नहीं हुआ तो उनकी डिग्री अवैध होगी।
जितेंद्र शर्मा, शिक्षाविद्