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काम नहीं करने वाली आशा सहयोगियों पर गिरेगी गाज, स्वास्थ्य विभाग उठाने वाला है कड़ा कदम

निर्देश के अनुसार जिला आशा समन्वयक, ब्लॉक आशा सुपरवाइजर और पीएचसी आशा सुपरवाइजर को आशा सहयोगिनियों से स्पष्टीकरण लेना होगा। इसके बाद काम नहीं करने वाली आशाओं को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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rajasthan health department will take action against asha sahyogini

काम नहीं करने वाली आशा सहयोगियों पर गिरेगी गाज, स्वास्थ्य विभाग उठाने वाला है कड़ा कदम

जोधपुर. आमजन तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए तैनात कई आशा सहयोगिनी फील्ड में काम नहीं कर रही हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष अप्रेल माह से अगस्त तक प्रदेश में कार्यरत 842 आशा सहयोगिनी ने शून्य प्रोत्साहन राशि अर्जित की है। काम के प्रति इनके नकारात्मक रवैये के कारण बड़ी संख्या में प्रसूताएं और नवजात टीकाकरण समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में नवजात को टीकाकरण और प्रसूताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ आशा सहयोगिनी के मार्फत ही मिलता है।

यह रिपोर्ट आने के बाद निदेशक (आरसीएच) ने प्रदेश के सभी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को शून्य प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाली आशाओं का भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। निर्देश के अनुसार जिला आशा समन्वयक, ब्लॉक आशा सुपरवाइजर और पीएचसी आशा सुपरवाइजर को आशा सहयोगिनियों से स्पष्टीकरण लेना होगा। इसके बाद काम नहीं करने वाली आशाओं को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में 50 हजार आशा सहयोगिनी
प्रदेश में करीब 50 हजार आशा सहयोगिनी हैं। इन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रतिमाह 27 सौ रुपए मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा गर्भवतियों को नौ माह तक चिकित्सा सेवाएं दिलाने के तीन सौ, प्रसव पश्चात तीन सौ रुपए और 42 दिन तक माता-शिशु को समुचित चिकित्सा सेवाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

बाड़मेर व नागौर में सर्वाधिक नकारा
सरकारी रिपोर्ट अनुसार बाड़मेर में 67 और नागौर में 61 आशाएं एक्टिव नहीं हैं। जयपुर प्रथम व द्वितीय में 61, जोधपुर जिले में 33, अजमेर-47, भरतपुर-21, बीकानेर-38, कोटा-6,उदयपुर जिले में 39, पाली जिले में 47 आशाएं एक्टिव नहीं हैं।

इनका कहना है
जोधपुर जिले में 2039 में से 33 आशा सहयोगिनी काम नहीं कर रही हैं। इनमें से कुछ बीमार या मातृत्व अवकाश पर हैं। कई ने काम करना बंद कर दिया। हम इस मामले की पड़ताल करेंगे।
- महावीरसिंह चारण, जिला आशा समन्वयक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जोधपुर

गुमशुदा बच्चों को ढूंढने के लिए ऑपरेशन ‘आशा’ शुरू
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राज्य में एक बार फिर ऑपरेशन ‘आशा’ शुरू किया गया है। 15 नवम्बर तक बालश्रम और गुमशुदा बच्चों की तलाश के प्रयास किए जाएंगे। पुलिस लाइन स्थित सरदार पटेल सभागार में बुधवार को आयोजित बैठक में पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके लिए फैक्ट्री, होटल, ढाबों आदि जगहों पर कार्य करने वाले बच्चों को मुक्त कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में दोनों जिलों के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, एसीपी और सभी थानाधिकारियों के साथ सीडब्ल्यूसी, एनजीओ आदि मौजूद थे।