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राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, तलाकशुदा परित्यकता पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाकशुदा परित्यकता पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र हो सकती है। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता संबंधी शर्त अविवाहित होने की व्याख्या करते हुए कहा यदि आवेदन के समय बेटी वैवाहिक संबंध में नहीं है तो वह पात्रता के मापदंड पूरे कर सकती है।

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court order

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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाकशुदा परित्यकता पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र हो सकती है। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता संबंधी शर्त अविवाहित होने की व्याख्या करते हुए कहा यदि आवेदन के समय बेटी वैवाहिक संबंध में नहीं है तो वह पात्रता के मापदंड पूरे कर सकती है।

मुख्य न्यायाधीश एस. रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश अशोककुमार गौड़ की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि राज्य की यह दलील मानने योग्य नहीं है कि अविवाहित होने का मतलब कभी भी अविवाहित होना माना जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अविवाहित शब्द की कोई अन्य व्याख्या करना संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत होगा।

दरअसल, मूल याचिकाकर्ता दीपिका शर्मा ने गृह रक्षा विभाग में प्लाटून कमांडर पद पर सेवारत रहते हुए अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। इसे 9 मार्च, 2017 को गृह रक्षा विभाग के महानिदेशक ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आवेदक अविवाहित पुत्री की श्रेणी में नहीं, तलाकशुदा परित्यकता श्रेणी में आती है। इस पर याची की ओर से अधिवक्ता आईआर चौधरी ने याचिका दायर करते हुए अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश की याचना की, जिसे एकलपीठ ने स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को नौकरी देने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार ने इसकी पालना नहीं की।

इस पर याची ने अवमानना याचिका दायर की, जिस पर एकलपीठ ने नोटिस जारी किए हैं। इस बीच, सरकार ने एकलपीठ के आदेश की अपील कर दी,जिस पर खंडपीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस व्याख्या से कोर्ट सहमत है कि अविवाहित पुत्री ओर एकलपुत्री समानार्थी शब्द है। किसी भी आवेदक की पिछली वैवाहिक स्थिति या उसकी रिक्तता उसके वर्तमान आवेदन के निर्धारण का आधार नहीं हो सकती। केवल यह देखा जाना ही विधिपूर्ण है कि आवेदक का स्टेटस आवेदन के समय अविवाहित है या नहीं।