
अविनाश केवलिया
Rajasthan News: ग्वारगम और सीडस में जोधपुर पहले भी नम्बर वन था और आज भी है, लेकिन करीब एक दशक पहले जो अचानक से बूम आया और ग्वार गम के भाव 10 गुना बढ़ गए, उसमें शुरू हुए उद्योगों को आखिरकार बंद होना पड़ा। एक ऐसा उद्योग जो हैंडीक्राफ्ट से पहले एक्सपोर्ट सेक्टर में जोधपुर का नाम बड़ा कर चुका था, वह रसातल में पहुंचा। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी वह इकाइयां जो उस बूम से पहले काम कर रही थी, उसमें प्रोडक्शन हो रहा है। आज इस उद्योग की बात इसलिए क्योंकि कभी हजारों लोगों को रोजगार देने वाला यह उद्योग अब आधे से भी कम में सिमट गया है।
ग्वार फली से सीड और उससे ग्वार गम का पाउडर बनाया जाता है। पूरे देश में सबसे ज्यादा प्रोडक्शन राजस्थान में होता है। देश का 70 प्रतिशत ग्वार फली का प्रोडक्शन राजस्थान में, इसके बाद हरियाणा व गुजरात का नंबर आता है। अब जोधपुर में सीड व पाउडर बनाने की कुल 40 से 50 इंडस्ट्री ही बची है।
जब ग्वारगम में बूम था तो 100 से ज्यादा नई इकाइयां खुली थी। तब इस सेक्टर में रोजगार भी 20 हजार को पार कर गया था। अब यह 3 से 5 हजार पर आया है। इसमें प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों रूप से रोजगार लेने वाले लोग शामिल है।
वर्ष 2012 के बाद अमरीका में ऑयल ड्रिलिंग में ग्वार पाउडर का उपयोग काफी कम हुआ। यही डिमांड में उछाल आने का सबसे बड़ा कारण था, इसके बाद लगातार भाव कम हुए और कई इकाइयां बंद होने लगी। अब पूरी तरह से ऑयल ड्रिलिंग में इसका उपयोग बंद है। इसके अलावा अन्य विकल्प आने से भी डिमांड कम हुई है।
Published on:
16 Jun 2024 09:46 am
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