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50 लाख बच्चों में से एक को होती है ये बीमारी, 9 साल के मासूम को AIIMS के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

Rajasthan News: समजातीय गुणसूत्र में उत्परिवर्तन होने से होता है डिस्टोनिया, हाथ-पैर अपने आप मुड़ जाते हैं

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Rajasthan News: जोधपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में आनुवंशिक बीमारी जेनेटिक डिस्टोनिया से पीड़ित 9 साल के बच्चे की पहली बार न्यूरो सर्जरी की गई। एम्स का दावा है कि राजस्थान में इस तरह का पहला ऑपरेशन है। एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने इस बीमारी के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के बेसल गेंगलिया क्षेत्र से ग्लोबस पेलेडस को बाइलेटरल पैलिडोटॉमी प्रोसिजर करके हटा दिया।

पूरी दुनिया में अब तक केवल 200 रोगी

बच्चा अब काफी स्वस्थ महसूस हो रहा है। अब वह अपने आप बैठ भी पा रहा है और हाथ-पैरों का मूवमेंट भी ठीक है। गौरतलब है कि जेनेटिक डिस्टोनिया 50 लाख में से केवल एक बच्चे को होता है। डिस्टोरिया सामान्यत: मेडिसिन की बीमारी है, जिसे दवाई देकर ठीक किया जाता है। अधिक बिगड़ने पर ही सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है। एम्स में जिस जीन की खराबी से डिस्टोनिया लेकर बच्चा पहुंचा, वैसे मामले में पूरी दुनिया में अब तक केवल 200 रोगी ही सामने आए हैं।

क्या है डिस्टोनिया

डिस्टोनिया दो प्रकार का जेनेटिक और एक्वायर्ड होता है। जन्म के समय जब बच्चा नहीं रोता है तो उसे एक्वायर्ड डिस्टोनिया हो जाता है। बच्चे के हाथ पैर अपने आप मुड़ने या ऐंठने लगते हैं। उसका नियंत्रण खत्म हो जाता है। अगर कोई होमवर्क करने के लिए पैन उठाना चाहता है तो हाथ, पैन के पास जाकर अपने आप ऐंठ जाता है। गर्दन, रीढ़ की हड्डी भी अपने आप मूव करती है। जबकि जेनेटिक डिस्टोनिया समजात 19वें गुणसूत्र में विकृति की वजह से होता है। एम्स जोधपुर में आए बच्चे में गुणसूत्र पर मौजूद केएमटी-2बी जीन में उत्परिवर्तन हो गया था, जिससे पीड़ित बच्चा ढंग से बैठ भी नहीं पा रहा था।

इन डॉक्टरों का रहा सहयोग

एम्स के पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. लोकेश सैनी, न्यूरो सर्जन डॉ. मोहित अग्रवाल, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सर्बेश तिवारी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. स्वाति छाबड़ा की टीम ने न्यूरोसर्जरी प्रमुख व चिकित्सा अधीक्षक डॉ दीपक झा और दुर्लभ रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सिंह के मार्गदर्शन में सर्जरी को अंजाम दिया।

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