
Rajasthan News : इस साल की आखातीज सुगंधा (बदला हुआ नाम) के लिए खुशियां लेकर आई है। सात साल पहले बाल विवाह के बंधन में जकड़ी सुगंधा बालिग होने से पहले ही बाल विवाह से आजाद हो गई। जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या दो ने सुगंधा के महज 10 साल की उम्र में हुए बाल विवाह को निरस्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाकर आखातीज पर समाज को कड़ा संदेश दिया। सुगंधा ने कहा कि मैं बाल विवाह के पिंजरे से आजाद हो गई हूं। अब मैं नर्सिंग कर अपने सपने पूरे कर माता-पिता का नाम रोशन करूंगी। यह बाल विवाह सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ.कृति भारती के सहयोग से निरस्त करवाया गया। डॉ. भारती ने अब तक 51 जोड़ों का बाल विवाह निरस्त करवाया है
जोधपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र निवासी कमठा मजदूर की बेटी 17 वर्षीय सुगंधा का महज 10 साल की उम्र में बाल विवाह हो गया था। सुगंधा 7 साल तक बालविवाह का दंश झेलती रही। उसे गौना करवाकर 16 साल की उम्र में ससुराल भी भेज दिया गया था, जहां उसके साथ अच्छा बर्ताव नहीं हुआ। डॉ.कृति ने करीब पांच माह पहले सुगंधा के बाल विवाह निरस्त का वाद पारिवारिक न्यायालय में दायर किया और अब फैसला आया है।
Published on:
10 May 2024 11:50 am
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